
Rahul Gandhi Gen Z को साधने की इन दिनों पूरी कोशिश कर रहे हैं। भारतीय राजनीति में युवाओं और खासकर ‘जेन जी’ (Gen Z) का वोट बैंक बेहद निर्णायक साबित हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव में ‘जेन जी’ सबसे अहम वोट बैंक बनकर उभरेगा। 1997 से 2012 के बीच जन्मी यह पीढ़ी पुरानी पीढ़ियों से कई मायनों में अलग है। पारंपरिक रैलियों और लंबे भाषणों से दूर रहने वाली इस पीढ़ी का ध्यान खींचने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी तक को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है।
इस बात को राहुल गांधी जेन जी को एक वोट बैंक के तौर पर शायद समझने की कोशिश कर रहे हैं। नीट (NEET) पेपर लीक के बाद सड़क पर उतरे छात्रों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन, उनके गुस्से और बेखौफ अंदाज का असर केंद्र सरकार पर भी पड़ा था। इस जनाक्रोश के बाद युवाओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने और उनके इस गुस्से को अपने साथ जोड़ने के लिए राहुल गांधी ने ‘जेन जी’ के साथ सीधे संवाद की रणनीति को और तेज कर दिया है। यही वजह है कि वे पारंपरिक मंच और माइक से इतर डिजिटल दुनिया और युवाओं के बीच सीधे जाने की नीति अपना रहे हैं।
Rahul Gandhi Gen Z से जुड़ने के लिए कर रहे ‘AMA‘ सेशन
अक्सर फिल्मी सितारे अपनी फिल्म रिलीज से पहले ‘Ask Me Anything‘ सेशन करते हैं, लेकिन अब राहुल गांधी जेन जी से जुड़ने के लिए भी यही तरीका अपना रहे हैं। उन्होंने अपने AMA सेशन में वीडियो के जरिए जवाब साझा किए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसमें उन्होंने केवल बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर ही बात नहीं की, बल्कि युवाओं के मजाकिए सवालों पर भी हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया दी। उदाहरण के लिए, जब एक यूजर ने पूछा-“क्या आप बैटमैन हैं?”, तो उनका जवाब था-“किसी ने मुझे और बैटमैन को एक साथ एक कमरे में नहीं देखा।” इस तरह की अनफिल्टर्ड और सहज बातचीत उन्हें युवाओं के लिए और अधिक ‘रिलेटेबल’ बनाती है।
E20 फ्यूल से लेकर फिटनेस तक की बातें
राहुल गांधी सिर्फ बड़ी-बड़ी राजनीतिक बातों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उन व्यावहारिक मुद्दों पर भी बोलते हैं जिनसे आज का युवा सीधा जुड़ता है। चाहे E20 पेट्रोल से गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर पड़ने वाले असर की बात हो या फिर अपनी फिटनेस दिनचर्या की- वे हर विषय पर खुलकर चर्चा करते नजर आते हैं। एक सेशन में उन्होंने साझा किया कि युवाओं को अच्छी फिटनेस के लिए ज्यादा स्नैकिंग और शराब आदि से दूर रहना चाहिए, साथ ही उन्होंने अपना फिटनेस मंत्र भी युवाओं के साथ शेयर किया।
कूल लुक और अनफिल्टर्ड अंदाज
एक दौर था जब राजनेताओं का मतलब केवल सफेद कुर्ता-पायजामा और गंभीर भाषण हुआ करता था। राहुल गांधी ने इस पारंपरिक छवि को तोड़ते हुए अपनी एक ‘कूल’ और कंफर्टेबल इमेज पेश की है। साल 2022 की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद राहुल गांधी कुर्ता-पायजामा छोड़कर टी-शर्ट, स्नीकर्स और सिक्स-पॉकेट ट्राउजर्स में नजर आने लगे। यह पहनावा भी युवाओं से सीधे जुड़ने का उनका एक तरीका है।
छात्रों और युवाओं के जमीनी मुद्दों को केंद्र में रखना
केवल सोशल मीडिया ट्रेंड्स ही नहीं, बल्कि युवाओं से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को भी राहुल गांधी प्रमुखता से उठा रहे हैं। चाहे NEET परीक्षा में धांधली हो या बढ़ती बेरोजगारी-वे हर मुद्दे पर छात्रों के साथ खड़े दिखते हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम AMA सेशन में झारखंड में हो रहे युवा आंदोलन पर ही सबसे पहला जवाब शेयर किया और कहा-“देश में जो भी छात्र आंदोलन हो रहे हैं, वे हमारी खराब हो चुकी शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ हैं। हमारी शिक्षा प्रणाली ध्वस्त हो चुकी है, यह महंगी और दमनकारी है। सरकार चाहे केंद्र की हो, झारखंड की हो या कांग्रेस की-हर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और इस व्यवस्था को बदलने के लिए कदम उठाने चाहिए।” गौरतलब है कि झारखंड में जेएमएम (JMM) की सरकार है, जिसमें कांग्रेस भी सहयोगी पार्टी है।
यूट्यूब से ‘ग्राउंड जीरो’ का कनेक्शन
राहुल गांधी यूट्यूब पर भी काफी सक्रिय हैं, जहां वे आम लोगों और युवाओं से अपनी अनफिल्टर्ड मुलाकातों के वीडियो शेयर करते हैं। चाहे दिल्ली के ऑटो ड्राइवर्स हों, कार मैकेनिक हों या जंतर-मंतर आंदोलन से रातों-रात वायरल हुए मोहम्मद इरफान जैसे युवा-बिना किसी औपचारिक मंच के उनके सुख-दुख और संघर्षों को सुनने का उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जाता है।
क्या वोटों में तब्दील होगा यह डिजिटल कनेक्शन?
भारतीय राजनीति में केवल वायरल कंटेंट या ‘कूल इमेज’ होना ही काफी नहीं होता। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि क्या वे इस डिजिटल जुड़ाव और युवाओं के भरोसे को ईवीएम (EVM) तक वोटों के रूप में ले जा पाते हैं या नहीं। लेकिन इतना तय है कि ‘जेन जी’ को लुभाने के इस दौर में राहुल गांधी की यह रणनीति राजनीतिक संचार के नए पैमाने तय कर रही है।
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