नई दिल्ली | Taaza Khabar Desk. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च 2026 को लोकसभा में भारत को आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त घोषित किया। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे समय सीमा से एक दिन पहले हासिल कर लिया गया। छह दशक से अधिक समय तक चली इस हिंसक बगावत का अंत भारतीय आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
नक्सल मुक्त भारत: तीन वर्षों में उग्रवाद पर प्रहार
2024 से मार्च 2026 के बीच सुरक्षा बलों ने 706 नक्सलियों को मुठभेड़ों में मार गिराया और 2,218 को गिरफ्तार किया। इसी अवधि में 4,839 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
लोकसभा में 90 मिनट के संबोधन में गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद का प्रसार गरीबी के कारण नहीं हुआ, बल्कि इस हिंसक विचारधारा के कारण प्रभावित क्षेत्रों में गरीबी और पिछड़ापन फैला। उन्होंने कहा कि वामपंथी चरमपंथ का उद्देश्य संवैधानिक व्यवस्था में अस्थिरता पैदा करना था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार शीर्ष कमांडरों के खात्मे ने माओवादी ढांचे को स्थायी रूप से कमजोर किया।
1967 से 2026 तक: नक्सलवाद का उदय और अंत
भारत में नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव से हुई थी। चारू मजूमदार के नेतृत्व में शुरू यह आंदोलन धीरे-धीरे कई राज्यों में फैला। 2004 में पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) और माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) के विलय से सीपीआई (माओवादी) का गठन हुआ।
सरकार ने UAPA, 1967 के तहत सीपीआई (माओवादी) को आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंध लगाया। सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (SRE) योजना के तहत नक्सल प्रभावित राज्यों को विशेष फंड भी दिया गया।
सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में विकास कार्य
प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 17,500 किलोमीटर सड़क निर्माण को मंजूरी दी गई, जिसमें से 12,000 किलोमीटर से अधिक का कार्य पूरा हो चुका है। इन इलाकों में 5,000 नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए, 1,804 नई बैंक शाखाएं खोली गईं और 1,321 नए ATM चालू किए गए।
सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए 596 किलेबंद पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए और CAPF की 406 नई यूनिट्स को रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया।
‘समाधान’ रणनीति और आगामी चुनौतियां
इस सफलता का श्रेय 2017 में लागू ‘समाधान’ (SAMADHAN) रणनीति को जाता है। इस बहुआयामी सुरक्षा रणनीति में स्मार्ट लीडरशिप, आक्रामक रणनीति और माओवादियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने पर जोर दिया गया था।
सशस्त्र उग्रवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार विचारधारा के स्तर पर इसे खत्म करना अभी बाकी है। सरकार के सामने अब हजारों आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व कैडरों के पुनर्वास की चुनौती है।
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