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मुंबई में महाराष्ट्र विधान भवन के बाहर सुरक्षा बलों की तैनाती

महाराष्ट्र विधान भवन को बम से उड़ाने की धमकी: बजट सत्र के बीच हड़कंप, जांच में निकली अफवाह

गुरुवार की सुबह मुंबई में उस वक्त हड़कंप मच गया जब महाराष्ट्र विधान भवन, बॉम्बे हाईकोर्ट और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को बम और मिसाइल से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। राज्य के बजट सत्र के ठीक बीच आई इस धमकी ने सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत हाई अलर्ट पर ला दिया। घंटों की गहन तलाशी के बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने इसे झूठी अफवाह करार दिया।

कैसे मिली धमकी?

सुबह 6:57 बजे कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक संदिग्ध संदेश आया। इसमें विधान भवन के अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट, BSE, मेट्रो नेटवर्क और कुछ प्रमुख बैंकों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस, बम निरोधक दस्ते (BDDS) और डॉग स्क्वॉड हरकत में आ गए। सुबह 8:25 बजे तक परिसर के सभी गेट बंद कर दिए गए और भरपूर तलाशी अभियान शुरू किया गया।

अधिकारियों ने क्या कहा?

महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने कहा, “बजट सत्र चल रहा है, इसलिए यह संवेदनशील समय है। BDDS और डॉग स्क्वॉड ने पूरे परिसर का निरीक्षण किया है।” गृह राज्य मंत्री संजय भोयर ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में यह पूरी तरह अफवाह लगती है। उन्होंने बताया कि ईमेल में खाड़ी देशों के युद्ध के संदर्भ में ‘मिसाइल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

बढ़ता पैटर्न, बढ़ती चिंता

यह कोई अकेली घटना नहीं है। एक दिन पहले ही 11 मार्च को गुरुग्राम के 12 प्रमुख प्राइवेट स्कूलों को भी ऐसे ही झूठे ईमेल मिले थे, जिससे हजारों बच्चों को सुरक्षित निकालना पड़ा। वर्ष 2024 में अकेले भारतीय विमानन क्षेत्र को 999 झूठी बम धमकियां मिलीं। ये घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के संसाधनों पर भारी बोझ डालती हैं और आम जनजीवन को बाधित करती हैं।

क्या होगी कानूनी कार्रवाई?

पुलिस अब ईमेल के IP एड्रेस को ट्रेस कर रही है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पकड़े जाने पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 351 (आपराधिक धमकी) और धारा 240 (झूठी सूचना देना) के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। IT Act के प्रावधान भी लागू होंगे।

विधान भवन की यह घटना डिजिटल युग में साइबर आतंकवाद की बढ़ती चुनौती का आईना है। अब सवाल यह है कि साइबर सेल कितनी जल्दी उस IP एड्रेस तक पहुंचती है — और सरकार ऐसी झूठी धमकियों पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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