Pan Masala Packaging Rules 2026 : सार्वजनिक जगहों, बसों और सड़कों के किनारे पान मसाला खाने और इसके दाग देखने को मिलना भारत में आम बात है। अब पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पान मसाला की पैकेजिंग के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें प्लास्टिक और कुछ अन्य सिंथेटिक पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
FSSAI के अप्रैल 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक, पान मसाला की पैकेजिंग के लिए पेपर, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज या अन्य प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। साथ ही टिन या ग्लास कंटेनर को भी विकल्प के तौर पर शामिल किया गया है।
पान मसाला के प्लास्टिक पाउच पर क्या है नया प्रस्ताव?
FSSAI के प्रस्तावित नियमों में पान मसाला की पैकेजिंग में प्लास्टिक से जुड़ी सामग्री के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। ड्राफ्ट में पॉलीथीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, PVC और अन्य सिंथेटिक पॉलिमर या लैमिनेट से मुक्त पैकेजिंग का प्रस्ताव है।
इसके अलावा एल्युमिनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल को भी प्रस्तावित पैकेजिंग सामग्री में शामिल नहीं किया गया है।
अब किस पैकेजिंग में मिल सकता है पान मसाला?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार पान मसाला कंपनियों के लिए कई वैकल्पिक पैकेजिंग विकल्प रखे गए हैं। इनमें मुख्य रूप से:
- पेपर
- पेपरबोर्ड
- सेल्यूलोज
- अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्री
- टिन कंटेनर
- ग्लास कंटेनर
शामिल हैं। यानी यदि यह प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो बाजार में पान मसाला के मौजूदा प्लास्टिक पाउच की जगह पेपर पैकेजिंग, टिन के डिब्बे या ग्लास कंटेनर ज्यादा देखने को मिल सकते हैं।
गुटखा और तंबाकू के प्लास्टिक पाउच पर भी रोक का प्रावधान
ड्राफ्ट में Plastic Waste Management Rules, 2016 के उन प्रावधानों को भी शामिल किया गया है, जिनके तहत प्लास्टिक के सैशे में गुटखा, तंबाकू और पान मसाला को स्टोर, पैक या बेचने पर रोक का प्रावधान है।
इसका उद्देश्य पान मसाला और तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को घटाना है।
क्या पान मसाला की कीमत बढ़ सकती है?
पैकेजिंग में बदलाव होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्लास्टिक पाउच की तुलना में टिन, ग्लास या कुछ बेहतर गुणवत्ता वाले पेपर पैकेजिंग विकल्प महंगे पड़ सकते हैं।
हालांकि, पान मसाला की कीमत कितनी बढ़ेगी, यह अभी निश्चित नहीं है। कीमत पर असर कंपनियों की पैकेजिंग लागत, उत्पादन लागत, टैक्स और बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर?
नए पैकेजिंग नियम लागू होने की स्थिति में पान मसाला निर्माताओं को अपनी पैकेजिंग व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके लिए नई मशीनरी, पैकेजिंग सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया में निवेश की जरूरत हो सकती है।
इसके अलावा पेपर, टिन या ग्लास पैकेजिंग के कारण स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की प्रक्रिया में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
कब लागू होंगे नए पान मसाला पैकेजिंग नियम?
यहां एक जरूरी बात समझना महत्वपूर्ण है। FSSAI ने 28 अप्रैल 2026 को Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 का ड्राफ्ट जारी किया था और लोगों से सुझाव/आपत्तियां मांगी थीं। FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर यह अभी ड्राफ्ट के रूप में सूचीबद्ध है।
इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित नियम कहना ज्यादा सही है। अंतिम अधिसूचना और प्रभावी तारीख की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही यह कहा जा सकेगा कि नियम कब से अनिवार्य रूप से लागू होंगे।
पर्यावरण को प्लास्टिक कचरे से राहत देने की कोशिश
पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के छोटे प्लास्टिक पाउच बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते हैं और इन्हें रिसाइकिल करना भी चुनौतीपूर्ण होता है। प्रस्तावित बदलाव का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसी पैकेजिंग में प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करना है।
FSSAI ने पान मसाला की पैकेजिंग के लिए प्राकृतिक सामग्री, टिन और ग्लास जैसे विकल्पों को प्रस्तावित करके पैकेजिंग को प्लास्टिक से मुक्त करने की दिशा में कदम उठाया है।
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