विशाखापत्तनम | ताज़ाखबर डेस्क। आंध्र प्रदेश में मार्च 2026 में एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यह मामला 2022 के कुख्यात श्रद्धा वालकर हत्याकांड — जिसमें आरोपी आफताब पूनावाला ने शव के टुकड़े कर नष्ट किए थे — की याद दिला रहा है। 29 मार्च 2026 को गजुवाका इलाके में एक नेवी कर्मचारी ने अपनी 28 वर्षीय प्रेमिका की बेरहमी से हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव के टुकड़े फ्रिज में छिपा दिए। इस विशाखापत्तनम मर्डर केस के मुख्य आरोपी ने 30 मार्च 2026 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
डेटिंग ऐप से शुरू हुई कहानी और खौफनाक अंत
इस विशाखापत्तनम मर्डर केस के आरोपी चिंताडा रवींद्र (35) की मुलाकात मृतका पोलिपल्ली मौनिका से 2021 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। रवींद्र भारतीय नौसेना के जहाज INS Dega में टेक्नीशियन के पद पर तैनात है। पुलिस के अनुसार, इन दोनों के बीच करीब पाँच सालों से संबंध थे।
घटना वाले दिन रवींद्र की पत्नी अपने मायके (विजयनगरम) गई हुई थी, जिसका फायदा उठाकर उसने मौनिका को अपने एलवी नगर स्थित फ्लैट पर बुलाया था।
विवाद की मुख्य वजह 3.5 लाख रुपये का आर्थिक लेन-देन था। मौनिका ने आरोपी से पैसे लिए थे और वह इस अवैध रिश्ते की जानकारी रवींद्र की पत्नी को देने की धमकी दे रही थी। पुलिस पूछताछ रिपोर्ट के अनुसार, इसी ब्लैकमेलिंग और तीखे विवाद के बाद आरोपी ने मौनिका की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने ऑनलाइन मंगाए गए चाकू से शव को काटा और कुछ हिस्से अपने घर के फ्रिज में रख दिए।
सबूत मिटाने के लिए अपनाई जघन्य तरकीब
हत्या के बाद आरोपी ने सबूत नष्ट करने की खौफनाक योजना बनाई। पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसने मृतका के सिर और हाथों को विशाखापत्तनम के निकट अडावीवरम के पास एक सुनसान इलाके में ले जाकर जला दिया। बाकी टुकड़ों को उसने उसी फ्रिज में रखा जहाँ वह अपना भोजन रखता था। यह व्यवहार गहरी मनोवैज्ञानिक विकृति और ‘कम्पार्टमेंटलाइजेशन’ (मन के अलग-अलग खानों में रखना) को दर्शाता है।
अपराध के तरीके और देश में इस तरह की घटनाओं के बढ़ते ट्रेंड को समझने के लिए कुछ अहम आंकड़े और कानूनी जानकारी इस प्रकार हैं:
| विवरण | आंकड़ा / तथ्य |
|---|---|
| अवैध संबंधों के कारण हत्याएं (नवीनतम उपलब्ध आंकड़े) | 1,921 मामले प्रतिवर्ष (NCRB रिपोर्ट) |
| डेटिंग ऐप से जुड़े अपराधों में वृद्धि | 35% की बढ़ोतरी (2026 तक के तीन सालों में) |
| सिर/पहचान वाले अंगों के बिना दोषसिद्धि दर | 40% से भी कम |
| मामले में लागू नए कानून (BNS 2024) | धारा 103 (हत्या) और धारा 238 (साक्ष्य मिटाना) |
पुलिस की जांच और फोरेंसिक चुनौतियां
आरोपी के गजुवाका पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण करने के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। हालांकि पुलिस के लिए इस मामले में कोर्ट के सामने कानूनी रूप से जुर्म साबित करना एक बड़ी चुनौती होगी। चूंकि आरोपी ने फिंगरप्रिंट्स और चेहरे की पहचान को जलाकर नष्ट कर दिया है, इसलिए अब शव की पूरी शिनाख्त केवल DNA प्रोफाइलिंग के जरिए ही संभव हो पाएगी।
फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के दिशानिर्देशों के अनुसार, जब मुख्य पहचान वाले अंग गायब होते हैं तो कोर्ट में दोषसिद्धि दर अक्सर 40% से नीचे गिर जाती है। ऐसे में पुलिस को आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत करने के लिए कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर भारी निर्भर रहना होगा।
कानूनी कार्रवाई और आगे की राह
यह विशाखापत्तनम मर्डर केस डिजिटल युग में अंध-विश्वास और रिश्तों की सुरक्षा पर सख्त कानूनी नियंत्रण की माँग करता है। 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत रवींद्र पर 2026 में मुकदमा चलेगा, जिसमें दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड का स्पष्ट प्रावधान है।
आगे की पुलिस जांच और फोरेंसिक रिकवरी ही इस मामले को सुलझाने और मृतका मौनिका को न्याय दिलाने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।
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