बसरा | पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच इराक के बसरा तट के पास अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर ईरानी नेवी ने आत्मघाती नाव से हमला किया। इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल कर बसरा पहुँचाया गया। घटना ने वैश्विक शिपिंग सुरक्षा और भारतीय नाविकों की जान पर मंडरा रहे खतरे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
कैसे हुआ हमला?
इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास इराकी जलक्षेत्र में उस वक्त हमला हुआ जब ‘सेफसी विष्णु’ ‘शिप टू शिप ट्रांसफर’ का काम कर रहा था। ईरान की विस्फोटकों से लदी एक आत्मघाती नाव ने सीधे टैंकर को टक्कर मारी। मार्शल आइलैंड्स के झंडे तले चलने वाला यह टैंकर 228.6 मीटर लंबा है और इसकी मालवहन क्षमता 73,976 टन है। बगदाद स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की कि बचाए गए 15 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और दूतावास इराकी अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की जवाबी कार्रवाई?
यह हमला अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की जवाबी कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है। हालिया हफ्तों में ईरान ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों को लगातार निशाना बनाया है। लेकिन सीधे इराकी जलक्षेत्र में एक तटस्थ वाणिज्यिक जहाज पर हमला इस संघर्ष में खतरनाक एस्केलेशन माना जा रहा है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने तत्काल प्रभाव से इस क्षेत्र के लिए ‘हमले की चेतावनी’ जारी कर दी है।
भारतीय नाविकों पर सबसे बड़ा खतरा
वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारतीय नाविकों की हिस्सेदारी 15% से अधिक है — यानी किसी भी जहाज पर हमले में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने का जोखिम सर्वाधिक रहता है। फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय जहाजों पर 778 नाविक तैनात हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से “तेल की एक बूँद भी नहीं गुजरने दी जाएगी” — यह बयान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधी चेतावनी है।
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वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर
इराक ने सुरक्षा कारणों से अपने तेल बंदरगाहों पर संचालन निलंबित कर दिया है। इराकी बंदरगाह महानिदेशक फरहान अल-फरतौसी ने बताया कि वाणिज्यिक बंदरगाह खुले हैं, लेकिन तेल टर्मिनल बंद कर दिए गए हैं। चूँकि इराक अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इन्हीं टर्मिनलों से निर्यात करता है, वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें उछाल की कगार पर हैं।
यह हमला स्पष्ट करता है कि मध्य पूर्व का संघर्ष अब सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा — इसने वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा को सीधे निशाना बनाना शुरू कर दिया है। असैन्य जहाजों पर इस तरह के हमले UNCLOS (1982) के तहत ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ का उल्लंघन हैं। अब सवाल यह है कि भारत सरकार अपने 778 फँसे हुए नाविकों की सुरक्षित वापसी और भविष्य के समुद्री व्यापार को बचाने के लिए क्या कूटनीतिक कदम उठाती है।
