मुंबई, 17 मार्च 2026 | Taaza Khabar Desk. महाराष्ट्र विधानसभा ने 16 मार्च 2026 को जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 (Dharma Swatantrya Adhiniyam 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया। गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर द्वारा पेश इस बिल में दोषियों के लिए अधिकतम 10 साल की जेल का प्रावधान है। विपक्षी MVA का हिस्सा होने के बावजूद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इस बिल का खुलकर समर्थन किया है।
बिल के मुख्य प्रावधान
इस कानून के तहत विवाह का वादा, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, चमत्कारी इलाज का प्रलोभन, और शिक्षा के जरिए brainwashing — इन सभी को allurement की श्रेणी में रखा गया है। स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले नोटिस देना और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। धर्मांतरण के बाद 25 दिनों के भीतर पंजीकरण न होने पर वह शून्य माना जाएगा।
यदि किसी रक्त संबंधी को संदेह हो कि धर्मांतरण बलपूर्वक हुआ है तो वे शिकायत दर्ज करा सकते हैं और पुलिस को FIR दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सजा के प्रावधान
| अपराध | सजा | जुर्माना |
|---|---|---|
| सामान्य अवैध धर्मांतरण | 7 साल तक | ₹5 लाख तक |
| नाबालिग, महिला या SC/ST पीड़ित | 7 साल तक | ₹5 लाख तक |
| सामूहिक धर्मांतरण | 10 साल तक | ₹7 लाख से अधिक |
यदि विवाह केवल अवैध धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया हो तो वह शून्य घोषित होगा। ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे को माँ के मूल धर्म का माना जाएगा और कस्टडी माँ को दी जाएगी।
उद्धव का समर्थन — सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है, लेकिन उनकी पार्टी जबरदस्ती, शोषण या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर कोई धमकी देकर धर्म बदलवाता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
महाराष्ट्र मंत्री शंभूराज देसाई ने UBT विधायक भास्कर जाधव के भाषण की सराहना करते हुए कहा कि UBT ने अच्छे काम में समर्थन देने की पहल की है।
ओवैसी और विपक्ष का विरोध
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे UP के कानून से भी बुरा बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून वास्तविक धर्मांतरण को भी अपराध बनाता है, अंतर-धार्मिक जोड़ों के लिए विवाह जोखिम भरा बनाता है और ‘brainwashing through education’ जैसे व्यापक शब्दों का मनमाने तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है कि सबूत का भार आरोपी पर डालने से निर्दोष अंतर-धार्मिक जोड़ों को परेशान किया जा सकता है।
पृष्ठभूमि और कानूनी चुनौती
फरवरी 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने DGP की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की थी जिसने अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर इस बिल का मसौदा तैयार किया।
बिल को Bombay High Court और सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (निजता का अधिकार) के आधार पर चुनौती दिए जाने की संभावना है।
CM फड़णवीस ने स्पष्ट किया कि यह बिल स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन को नहीं रोकता, बल्कि केवल धोखाधड़ी, जबरदस्ती और लालच से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाता है।
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