यूपी सरकार ने क्यों किया Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU रद्द?

लखनऊ | Taaza Khabar Desk. उत्तर प्रदेश में निवेश और तकनीकी विकास को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने 26 मार्च 2026 को बड़ा कदम उठाते हुए 25,000 करोड़ रुपये का Puch AI MoU रद्द कर दिया है। यह समझौता उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का हब बनाने के उद्देश्य से महज चार दिन पहले 23 मार्च 2026 को बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘पुच एआई’ (Puch AI) के साथ साइन किया गया था।

Puch AI MoU रद्द होने के मुख्य कारण

इन्वेस्ट यूपी के अनुसार, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के सख्त नियमों के तहत कंपनी से विस्तृत बिजनेस प्लान और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। इस प्रोजेक्ट को लेकर इन्वेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद ने स्पष्ट किया था कि कंपनी के साथ किया गया यह समझौता गैर-बाध्यकारी था और उन्हें आवश्यक ‘ड्यू डिलिजेंस’ दस्तावेज जमा करने के लिए केवल 3 दिन का समय दिया गया था। तय समय सीमा के भीतर ये दस्तावेज न मिलने और कंपनी की “पर्याप्त नेटवर्थ व विश्वसनीय वित्तीय लिंक के अभाव” के कारण सरकार को तुरंत यह सख्त कदम उठाना पड़ा। सरकारी निवेश नीतियों के अंतर्गत, कोई भी एमओयू तब तक ‘लीगली बाइंडिंग’ या कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता, जब तक कि वह विस्तृत ‘ड्यू डिलिजेंस’ की प्रक्रिया से पूरी तरह न गुजर जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को ही यह साफ कर दिया था कि जो भी संभावित निवेशक तय वित्तीय मानकों (Financial Credibility Benchmarks) पर खरा नहीं उतरेगा, उसका समझौता स्वतः समाप्त माना जाएगा। राज्य के प्रोटोकॉल (SOP) के अनुसार भी, यदि कोई कंपनी निर्धारित समय में अपनी वित्तीय क्षमता साबित नहीं करती है, तो एमओयू अपने आप खत्म हो जाता है। इसी नीतिगत प्रावधान का सख्ती से पालन करते हुए सरकार ने कार्रवाई की।

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क्या है 43 लाख के रेवेन्यू का पूरा विवाद?

इस बड़े समझौते के तहत लखनऊ एयरपोर्ट के पास भारत की पहली ‘AI City’ विकसित करने का एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव था। लेकिन विवाद ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया और आलोचकों द्वारा यह दावा किया गया कि 25,000 करोड़ का निवेश लाने वाली कंपनी का कुल सालाना रेवेन्यू मात्र 42.9 लाख रुपये है। इस दावे के तुरंत बाद टेक विशेषज्ञों ने भी कंपनी की असलियत और अनुभव पर कई गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ भी जोड़ा गया, जिसमें स्पष्ट तौर पर बताया गया कि पुच एआई केवल एक साल पुराना स्टार्टअप है। इस पूरे मामले पर Puch AI के सह-संस्थापक सिद्धार्थ भाटिया को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 42.9 लाख रुपये का यह आंकड़ा Google AI के एक बग के कारण ‘Pucho AI’ नामक किसी अन्य कंपनी से जुड़ गया था, जिसने जनता के बीच भारी भ्रम पैदा हुआ。

सार्वजनिक धन और PPP मॉडल की हकीकत

विपक्षी दलों और कई आलोचकों का कड़ा तर्क था कि महज 1 साल पुराने स्टार्टअप, जिसके पास अपना कोई बुनियादी एआई मॉडल तक नहीं है, उसके साथ बिना किसी गहरी जांच के 25,000 करोड़ का एमओयू करना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक चूक है। इसके अलावा, टेक कम्युनिटी ने पुच एआई के संस्थापक पर पहले भी “20 बिलियन डॉलर की बड़ी कंपनी Perplexity को खरीदने” जैसे अवास्तविक और भ्रामक मार्केटिंग स्टंट करने के आरोप लगाए हैं।

हालांकि, इन सभी आरोपों के बीच सिद्धार्थ भाटिया का यह कहना था कि इस 25,000 करोड़ के भारी भरकम प्रोजेक्ट में जनता का पैसा बिल्कुल नहीं लगना था। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से 100% निजी निवेश (Private investment) पर आधारित था और इसे निजी निवेशकों के माध्यम से एक पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किया जाना था। इसके बावजूद, असलियत यह रही कि कंपनी इतनी बड़ी रकम जुटाने का कोई भी ठोस प्रमाण सरकार के सामने प्रस्तुत नहीं कर सकी।

भविष्य की निवेश नीतियां और राज्य का मजबूत रुख

इतनी जल्दी पुच एआई एमओयू रद्द होने से राज्य की निवेश प्रक्रिया (Investment Policy) और उसकी मूल्यांकन प्रणाली पर कुछ सवाल जरूर खड़े हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल कागजी दावों के आधार पर इतने बड़े एमओयू साइन करने से पहले ‘प्री-इवैल्यूएशन’ और ‘फाइनेंशियल बैकग्राउंड चेक’ का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। हालांकि, सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य में किसी भी अपारदर्शी निवेश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह संपूर्ण विवाद भारत में तेजी से उभरते AI इकोसिस्टम और सरकारी निवेश नीतियों के लिए एक बड़ा सबक प्रस्तुत करता है। Invest UP द्वारा पुच AI MoU रद्द किए जाने के बाद, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अपनी ‘AI City’ की इस भव्य महत्वाकांक्षा को धरातल पर उतारने के लिए भविष्य में किस विश्वसनीय और स्थापित टेक पार्टनर का चुनाव करती है। यह निश्चित है कि राज्य सरकार आगे से किसी भी बड़े समझौते को अंतिम रूप देने से पूर्व कंपनियों की वित्तीय साख का और अधिक कड़ाई से परीक्षण करेगी।

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