नई दिल्ली | Taaza Khabar Desk.
27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई और वैश्विक संकट के बीच Petrol Diesel Excise Duty में ₹10 प्रति लीटर की ऐतिहासिक कटौती की घोषणा की है। इस बड़े फैसले के बाद डीजल पर यह कर पूरी तरह से शून्य हो गया है, जबकि पेट्रोल पर टैक्स भारी गिरावट के साथ लागू रहेगा। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उठाया गया है।

करों में अभूतपूर्व राहत और वर्तमान कर संरचना
वित्त मंत्रालय के हालिया निर्देश के बाद देश में ईंधन पर लगने वाले केंद्रीय करों में बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने आम नागरिक और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है।
नीचे दी गई तालिका में पेट्रोल और डीजल पर कर कटौती के स्पष्ट आंकड़े दर्शाए गए हैं:
| ईंधन का प्रकार | पुरानी एक्साइज ड्यूटी | नई एक्साइज ड्यूटी | कुल कटौती |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹13 प्रति लीटर | ₹3 प्रति लीटर | ₹10 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹10 प्रति लीटर (अनुमानित) | शून्य (Zero) | ₹10 प्रति लीटर |
इस कटौती के बाद पेट्रोल पर केंद्र का कर अब मात्र 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है। दूसरी ओर, डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से हटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे पहले मई 2022 में भी महंगाई को काबू करने के लिए सरकार ने पेट्रोल पर ₹8 और डीजल पर ₹6 की एक्साइज ड्यूटी घटाई थी।
Petrol Diesel Excise Duty घटाने का मुख्य कारण
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। महज एक महीने के भीतर क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। इस भारी उछाल का मुख्य कारण मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चरम पर पहुंचा युद्ध है।
ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है। इस मार्ग से प्रतिदिन दुनिया का लगभग 20-25 मिलियन बैरल तेल गुजरता है, जो कि वैश्विक सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) है। इस नाकेबंदी से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर आए इस भू-राजनीतिक उथल पुथल का सीधा असर भारतीय बाजार और आयात बिल पर पड़ रहा है।
क्या आम जनता को तुरंत मिलेगा सस्ता पेट्रोल?
सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल एक्साइज ड्यूटी में की गई इस भारी कटौती के बावजूद, विशेषज्ञों और उद्योग सूत्रों का मानना है कि ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर तुरंत कोई राहत नहीं मिलेगी। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगे कच्चे तेल के कारण लंबे समय से भारी घाटे (Under recoveries) का सामना कर रही हैं।
यह माना जा रहा है कि कंपनियां इस टैक्स कटौती का इस्तेमाल अपने घाटे की भरपाई के लिए करेंगी, जिसके कारण रिटेल कीमतें फिलहाल जस की तस बनी रहेंगी। इस बात का स्पष्ट उदाहरण निजी फ्यूल रिटेलर ‘नायरा एनर्जी’ है, जिसने वैश्विक दबाव का हवाला देते हुए सरकारी घोषणा से एक दिन पहले (26 मार्च) ही पेट्रोल पर ₹5.3 और डीजल पर ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी थी।
भारत की आपातकालीन तैयारियां और रणनीतिक भंडार
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता और आयातक देश है। संकट की इस घड़ी में ईंधन की कमी की आशंकाओं को दूर करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की स्थिति सुरक्षित है।
वर्तमान में देश के पास 60 दिनों का आपातकालीन कच्चा तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) और 30 दिनों की LPG सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके अलावा, घरेलू आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए भारत रूस जैसे देशों के साथ नए कच्चे तेल के अनुबंधों में भी तेजी ला रहा है।
भविष्य में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और मध्य पूर्व का तनाव जल्द नहीं सुलझता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक उथल पुथल देखने को मिल सकती है। ऐसे में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुमानों के मुताबिक, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार को Petrol Diesel Excise Duty के प्रबंधन के साथ साथ अपनी आयात नीतियों में और भी बड़े रणनीतिक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
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