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SPACEX का एक रॉकेट चाँद से कैसे टकरा गया: वास्तव में क्या हुआ?

हाल ही में एक खबर पूरी दुनिया में चर्चा की विषय बन गई जब SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के एक हिस्से की चाँद से टकरा जाने की जानकारी सामने आई  यह घटना अपने आप में बहुत रोचक एवं महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं कि हकीकत में क्या हुआ।

आखिर SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया कैसे?

यह घटना SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के ऊपर की हिस्से से जुड़ी है, जो की रॉकेट का दूसरा हिस्सा होता है। रॉकेट का पहला हिस्सा यानी बूस्टर लॉन्च के बाद सुरक्षित रूप से धरती पर वापस लौट आया था, जैसा कि आमतौर पर SPACEX  के मिशनों में होता है। यह रॉकेट 15 जनवरी, 2025 को दो कमर्शियल लूनर लैंडर्स को लेकर रवाना हुआ था – Firefly Aerospace का “Blue Ghost” और ispace का “Resilience”।

जहां रॉकेट के पहले हिस्से या बूस्टर लॉन्च के कुछ ही समय बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आया था, वहीं बूस्टर से ऊपर के हिस्से जो की लैंडर्स को चाँद की ओर ले गया वह अपना काम पूरा होने के बाद अंतरिक्ष में ही रह गया था। 

आमतौर पर पृथ्वी की निचली कक्षा में इस्तेमाल किए जाने वाले बूस्टर से ऊपरी हिस्सों को जानबूझकर पृथ्वी के वायुमंडल में जलाकर नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि यह हिस्सा एक अलग रास्ते पर था और समय के साथ चाँद की ओर बढ़ता गया।

टक्कर के दौरान रॉकेट की स्पीड और असर कितना था?

रिपोर्टों के मुताबिक spacex के इस रॉकेट के इस हिस्से का वजन लगभग 4 टन था और टकराते समय यह 5,000 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ रहा था। विशेषज्ञ के अनुसार इस टक्कर की ताकत लगभग तीन टन TNT के धमाके के बराबर मानी जा रही है। यह टक्कर चाँद के उस हिस्से में हुई जो की पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता है। यह जगह ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास है।

SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया

SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया! इस टक्कर का पता कैसे चला?

रोचक बात यह है कि इस टक्कर का पता सबसे पहले किसी बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी या किसी विख्यात न्यूज़ चैनल ने नहीं बल्कि एक स्वतंत्र खगोलशास्त्री ने लगाया। बिल ग्रे, जिन्होंने ‘प्रोजेक्ट प्लूटो’ नाम का सॉफ्टवेयर बनाया है। वे खासकर अंतरिक्ष की उन वस्तुओं पर नजर रखते हैं जिनकी निगरानी आमतौर पर सेना की ट्रैकिंग सिस्टम नहीं करते हैं।

इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करके बिल ग्रे यह बता पाए कि SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया। उनकी खोज की पुष्टि बाद में NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों ने की। जिनमें ‘सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज़’ भी शामिल था। यह सेंटर आमतौर पर उन चीजों पर नजर रखता है जिनसे पृथ्वी को खतरा हो सकता है।

क्या पहले भी SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया है?

उल्कापिंड / उपग्रह / लैंडर / अंतरिक्ष यान का चाँद से टकराना कोई नई बात नहीं है। भले ही उपग्रह / लैंडर / अंतरिक्ष यान का चाँद से टकराना सामान्य खबर न हो पर प्राकृतिक उल्कापिंड तो अक्सर चाँद की सतह से टकराते रहते हैं। 

अतीत में अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्री और हाल ही में आर्टेमिस II क्रू ने भी ऐसी टक्करों से होने वाली रोशनी की चमक देखी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे चाँद पर मिशन बढ़ेंगे अंतरिक्ष में मौजूद मलबे के चाँद से टकराने की संभावना भी बढ़ती जाएगी।

अब आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों की माने तो अच्छी बात यह है कि SpaceX रॉकेट चाँद से टकराया पर इससे चाँद को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। इस टक्कर से चाँद की सतह पर बस एक नया छेद (crater) बन गया है। चाँद की सतह इस तरह की टक्कर झेलने के लिए बनी है। 

फिर भी यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है, पृथ्वी से दूर घूम रहे अंतरिक्ष में मौजूद मलबे और उनका चंद्रमा से टकराने की बढ़ती संभावना। जैसे-जैसे अंतरिक्ष में खोज तेज हो रही है वैसे ही मलबे पर नजर रखने और उसे सावधानी से संभालने की जिम्मेदारियाँ भी बढ़ रही है।

अब तक की घटना यह याद दिलाती है कि अंतरिक्ष भी इंसानी दखल से अछूता नहीं रह गया है। और जैसे-जैसे अधिक से अधिक मिशन चाँद की ओर बढ़ेंगे, फिर ऐसी घटनाएं अनोखी बात नहीं बल्कि एक सामान्य सच्चाई बन जाएंगी। जिसके लिए वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों को योजनाएं बनानी होगी।

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