नई दिल्ली | मध्य पूर्व तनाव के कारण भारत में एलपीजी संकट गहराया है। 30 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने रसोई गैस की भारी कमी का सामना कर रहे आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 60 दिनों के लिए पीडीएस केरोसिन फिर से शुरू किया है। यह अभूतपूर्व एलपीजी संकट और पीडीएस केरोसिन का वितरण देश में ऊर्जा आपूर्ति की वर्तमान चुनौती को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
60-दिवसीय आपातकालीन पीडीएस केरोसिन योजना
रसोई गैस (LPG) की कमी से जूझ रहे आम घरों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने देश के 21 ऐसे क्षेत्रों में सुपीरियर केरोसिन ऑयल (SKO) फिर से शुरू किया है, जिन्हें पहले ‘केरोसिन मुक्त’ घोषित किया जा चुका था। सरकार ने इस योजना को सुचारू बनाने के लिए ज़िला स्तर पर सख्त नियम तय किए हैं। इस योजना के तहत प्रत्येक ज़िले में अधिकतम दो अधिकृत ईंधन स्टेशनों को 5,000 लीटर तक केरोसिन जमा करने की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सामान्य कोटे के ऊपर 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन मंजूर किया गया है। आपूर्ति की यह कमी सीधे तौर पर उद्योगों को भी प्रभावित कर रही है। वर्तमान में औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उनकी सामान्य खपत का केवल 80% हिस्सा ही मिल पा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद का भारत पर प्रभाव
इस ऊर्जा आपातकाल का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष है। वैश्विक तेल व्यापार का 20-30% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर व्यापारिक जहाजों और टैंकरों की आवाजाही को नियंत्रित करने से भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ा है, जो अपनी तेल ज़रूरत का 85% आयात करते हैं। आपूर्ति श्रृंखला में आई इस बाधा ने घरेलू गैस वितरण को बुरी तरह से प्रभावित किया है। वैश्विक तेल व्यापार और आयात डेटा के बारे में अधिक जानकारी पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।
कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई और पीएनजी की ओर झुकाव
बाजार में घबराहट और जमाखोरी की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। स्थिति का फायदा उठाने वाले कालाबाज़ारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन ने देशभर में 2,900 से अधिक छापे मारे हैं और लगभग 1,000 एलपीजी सिलेंडर ज़ब्त किए हैं। आपातकालीन आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act, 1955) के तहत डीलरों और ट्रांसपोर्टरों के लिए कुछ लाइसेंसिंग आवश्यकताओं में अस्थायी ढील दी है।
इस संकट के बीच लोग तेजी से पाइपलाइन गैस का रुख कर रहे हैं। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुख करते हुए, केवल कुछ ही दिनों में 6,000 पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) उपभोक्ताओं ने अपने बैकअप LPG कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। सरकार भी पीएनजी अपनाने को बढ़ावा दे रही है, और मार्च के महीने में ही 2,90,000 नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं।
भविष्य में अगर मध्य पूर्व में यह कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध लंबा खिंचता है, तो भारत को अपने 9.5 दिनों के रणनीतिक तेल भंडार से आगे एक लंबी अवधि की ऊर्जा सुरक्षा नीति तैयार करनी होगी। एलपीजी संकट और पीडीएस केरोसिन का यह विकल्प फिलहाल जनता को फौरी राहत दे रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और घरेलू ऊर्जा विकल्पों में तेजी लाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान साबित होगा।
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