दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: लश्कर कमांडर शब्बीर अहमद लोन बांग्लादेश बॉर्डर से गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक अत्यंत जटिल और लंबे खुफिया ऑपरेशन के बाद लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के खूंखार कमांडर शब्बीर अहमद लोन को बांग्लादेश सीमा के समीप से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता प्राप्त की है। इस त्वरित कार्रवाई ने राजधानी दिल्ली सहित देश के कई प्रमुख शहरों में होने वाले एक बहुत बड़े संभावित आतंकी हमले की साजिश को पूरी तरह से नाकाम कर दिया है।

कैसे पकड़ा गया ‘कश्मीरी राजा’ शब्बीर अहमद लोन

लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार से बच रहे इस वांटेड आतंकी को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा की सीधी निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। लगभग दो महीने तक चले इस गहन खुफिया ऑपरेशन का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (Add.CP) प्रमोद कुशवाहा और ACP ललित नेगी ने बेहद गुप्त तरीके से किया।

जांच में यह अहम तथ्य सामने आया है कि अंडरवर्ल्ड और आतंकी हलकों में ‘कश्मीरी राजा’ के नाम से कुख्यात यह आतंकी मुख्य रूप से ढाका के पास एक सुरक्षित ठिकाने से अपना पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के सीधे निर्देशों पर काम करते हुए, यह भारत के विभिन्न हिस्सों में नए स्लीपर सेल तैयार करने की साजिश में जुटा था।

2007 से लेकर 2026 तक का आपराधिक सफर

शब्बीर अहमद लोन का आतंकवाद और अपराध की दुनिया से पुराना नाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसे पहली बार वर्ष 2007 में दिल्ली पुलिस द्वारा आत्मघाती हमले की गंभीर साजिश रचने और हथियारों की अवैध तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय की गई सख्त कार्रवाई ने उसके शुरुआती मंसूबों पर पानी फेर दिया था।

कई वर्षों तक तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा काटने के बाद, वर्ष 2019 में जमानत मिलने का अनुचित लाभ उठाकर वह देश की सीमाओं से पार भागने में सफल रहा। बांग्लादेश पहुंचने के बाद उसने तुरंत पाकिस्तानी आकाओं से संपर्क साधा और भारत विरोधी गतिविधियों को तेज करने के लिए एक नए और बेहद खतरनाक टेरर मॉड्यूल की नींव रखी।

बरामदगी और चांदनी चौक में हमले की साजिश का पर्दाफाश

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे आतंकी मॉड्यूल की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक, गोपनीय और संगठित थी। यह नेटवर्क दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु के तिरुप्पुर जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में धकेल रहा था। इस वर्ष फरवरी 2026 में, पुलिस ने इसी नेटवर्क पर बड़ी चोट करते हुए 8 अन्य संदिग्ध गुर्गों को गिरफ्तार किया था।

फरवरी 2026 की कार्रवाई में गिरफ्तारियां और बरामदगी:

विवरणप्राप्त जानकारी
गिरफ्तार सदस्यकुल 8 संदिग्ध, जिनमें 7 अवैध बांग्लादेशी नागरिक शामिल
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स10 संदिग्ध मोबाइल फोन तथा POS मशीनें
आपत्तिजनक दस्तावेजफर्जी पासपोर्ट, बेनामी क्रेडिट और डेबिट कार्ड
हमले का लक्ष्यचांदनी चौक के प्रमुख मंदिर की रेकी तस्वीरें और लोकेशन कोऑर्डिनेट्स

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बरामद डेटा ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। चांदनी चौक के प्रमुख धार्मिक स्थल की रेकी की तस्वीरें यह स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि यह आतंकी संगठन राजधानी में किसी बड़े धार्मिक स्थल को निशाना बनाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और देश भर में दंगे भड़काने की साजिश रच रहा था।

टीआरएफ (TRF) का बढ़ता खतरा और सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन

सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवाद के खिलाफ यह गिरफ्तारी एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत मानी जा रही है। दिल्ली पुलिस इस बेहद गंभीर मामले में गैर कानूनी गतिविधियां अधिनियम (UAPA), 1967 और आर्म्स एक्ट (Arms Act) की विभिन्न कड़ी धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है।

इस बड़ी सफलता के बावजूद, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के खिलाफ मंडरा रहे आतंकी खतरे अभी पूरी तरह टले नहीं हैं। जांच एजेंसियां अब एक अन्य वांटेड आतंकी शेख सज्जाद गुल की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। गुल को वर्ष 2002 में गिरफ्तार किया गया था और 2017 में रिहाई के बाद वह पाकिस्तान भाग गया था। वर्तमान में वह लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन से कश्मीर में ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) नामक नए आतंकी गुट का नेतृत्व कर रहा है, जो सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती बन गया है।

शब्बीर अहमद लोन की यह गिरफ्तारी भारत सरकार की आतंकवाद के खिलाफ अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का एक प्रत्यक्ष और अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण है। आने वाले समय में खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों द्वारा इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ विरोधी निगरानी तंत्र को और अधिक सख्त किया जाएगा। इस गहन जांच के दौरान आगामी हफ्तों में कुछ और बड़े स्लीपर सेल का पर्दाफाश होने की प्रबल संभावना है, जिससे राष्T की आंतरिक सुरक्षा और भी अभेद्य बन सकेगी।

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