हैदराबाद | Taaza Khabar Desk. — हैदराबाद में मिलावटी मिठाइयाँ बेचने वाले निर्माताओं के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officials) ने एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई की है। शहर के क्षेत्र स्थित विभिन्न विनिर्माण इकाइयों पर की गई इस औचक छापेमारी में टीम ने सुरक्षा और गुणवत्ता उल्लंघनों की पहचान करते हुए 2 लाख रुपये मूल्य की मिलावटी मिठाइयाँ और नकली बेकरी स्नैक्स आइटम ज़ब्त किए। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले गैर-कानूनी निर्माताओं के खिलाफ विभाग का एक सख्त कदम है।
हैदराबाद में मिलावटी मिठाइयाँ: त्योहारी मांग और गुणवत्ता का खुला उल्लंघन
पिछले कुछ महीनों से हैदराबाद और तेलंगाना क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार होटलों, रेस्तरां और बेकरी इकाइयों का औचक निरीक्षण कर रहा है। त्योहारों और गर्मियों के मौसम में मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की मांग अत्यधिक बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर कुछ निर्माता अवैध गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं। छापेमारी के दौरान [UNIT_NAME] सहित कई विनिर्माण इकाइयों में अखाद्य रंगों (non-edible colours), घटिया खाद्य तेल और अवधि पार (expired) उत्पादों का उपयोग पाया गया, जो जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमानक बेकरी उत्पादों के लगातार सेवन से उपभोक्ताओं में पेट के संक्रमण, फूड पॉइजनिंग और दीर्घकालिक रूप से लिवर व किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो जाता है। इस छापेमारी का तात्कालिक प्रभाव यह है कि स्थानीय बाज़ार में मिलावटखोरों के बीच डर का माहौल बना है। [OFFICER_NAME] के नेतृत्व में की गई यह कार्रवाई भविष्य में आम उपभोक्ताओं को जागरूक करने के साथ ही स्वच्छ और सुरक्षित उत्पादों की बाज़ार में पहुँच सुनिश्चित करेगी।
भारत में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और ताज़ा राष्ट्रीय आँकड़े
भारत में खाद्य मिलावट एक व्यापक समस्या बन चुकी है। इसे रोकने के लिए सरकारी स्तर पर कई कदम उठाए जा रहे हैं। संसद और संबंधित मंत्रालयों द्वारा हाल ही में प्रस्तुत आँकड़े इस समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं।
| खाद्य सुरक्षा मानदंड | ताज़ा आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| कुल दर्ज शिकायतें | वित्तीय वर्ष 2024-25 में ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ प्लेटफॉर्म पर 7,705 शिकायतें दर्ज हुईं (स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, संसदीय आँकड़े) |
| शिकायतों का समाधान | कुल प्राप्त शिकायतों में से 5,952 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान किया गया |
| नमूनों का विश्लेषण | पिछले तीन वर्षों (2022-23 से 2024-25) में देश भर में 5,18,559 खाद्य नमूनों का परीक्षण किया गया |
| खाद्य परीक्षण लैब | FSSAI द्वारा वर्तमान में 252 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएँ और 24 रेफरल लैब अधिसूचित हैं |
स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय / FSSAI, संसदीय आँकड़े 2024-25
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम तथा FSSAI के सख्त नियम
भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006’ (Food Safety and Standards Act, 2006) मुख्य कानूनी ढाँचा है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द और कारावास की सज़ा का प्रावधान है।
संसदीय आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 88,192 मामलों में जुर्माना लगाया गया है और 3,614 मामलों में दोषसिद्धि हुई है। इसके साथ ही गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर 1,161 व्यवसायों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। व्यवस्था को वैज्ञानिक बनाने के उद्देश्य से FSSAI ने एक ‘जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली’ (Risk Based Inspection System) विकसित की है, जो खाद्य उत्पादों से जुड़े जोखिम के स्तर के आधार पर निरीक्षण की आवृत्ति तय करती है।
मौजूदा चुनौतियाँ और शिकायत निवारण तंत्र
इन सकारात्मक कदमों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। पर्याप्त खाद्य निरीक्षकों की कमी और देश में मात्र 252 परीक्षण प्रयोगशालाएँ नियमित निगरानी में बड़ी बाधा हैं। छोटे और असंगठित क्षेत्र के विक्रेताओं का तर्क है कि FSSAI की लाइसेंसिंग प्रक्रिया उनके लिए महंगी और जटिल है।
तेलंगाना राज्य में पिछले एक वर्ष में खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापेमारी अभियानों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ाई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार रमज़ान, दीपावली और ग्रीष्मकाल जैसे उच्च-मांग वाले मौसमों में विशेष अभियान चलाए जाते हैं, ताकि उपभोक्ताओं को मिलावटी उत्पादों से बचाया जा सके।
उपभोक्ता अब सीधे ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ मोबाइल ऐप या FoSCoS पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता शिकायतों पर विनियामक कार्रवाई की जिम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित राज्य के खाद्य सुरक्षा विभागों की है। आने वाले समय में उन्नत तकनीक आधारित निगरानी और FSSAI की जोखिम आधारित प्रणाली के विस्तार से ऐसी अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
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