डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारियाँ अंतिम चरण में: 1 अप्रैल से शुरू होगा भारत का सबसे बड़ा अभियान

नई दिल्ली। भारत की 16वीं और पहली पूर्ण रूप से डिजिटल जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहा है। भारत के महापंजीयक (RGI) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस बार पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस रखा गया है, जिससे अधिकांश आँकड़े 2027 के अंत तक प्रकाशित कर दिए जाएंगे। इस महाभियान में पहली बार नागरिकों को मोबाइल ऐप के जरिए स्व-गणना का अधिकार भी दिया जा रहा है।

डिजिटल जनगणना 2027 के मुख्य चरण और विस्तृत प्रक्रिया

भारत की 16वीं जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था। एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2020 के बाद से विश्व के 143 देशों ने अपनी राष्ट्रीय जनगणना सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, लेकिन भारत इस सूची में अब तक पीछे था। अब सरकार इस ऐतिहासिक अंतर को पाटने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत के महापंजीयक (RGI) मृत्युंजय कुमार नारायण ने स्पष्ट किया है कि जमीनी स्तर पर तैयारियाँ अब उन्नत स्तर पर पहुँच चुकी हैं।

इस विशाल प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से पूरा करने के लिए इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण मकान सूचीकरण का होगा, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक पूरे देश में चलेगा। इस चरण के दौरान नागरिकों से उनके आवास और सुविधाओं से जुड़े कुल 34 महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके पश्चात दूसरा चरण जनसंख्या गणना (Population Enumeration) का होगा।

यह दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इस गणना को सटीक रखने के लिए सरकार ने 1 मार्च 2027 को आधिकारिक संदर्भ तिथि के रूप में निर्धारित किया है, हालांकि कुछ बर्फीले और दुर्गम इलाकों के लिए तिथियों में मामूली बदलाव हो सकता है।

स्व-गणना का नया अधिकार और तकनीकी बदलाव

इस बार की जनगणना का सबसे क्रांतिकारी पहलू इसका पूरी तरह से डिजिटल होना है। पिछले दशकों की तरह कागजी अनुसूचियों के भारी भरकम बंडलों का उपयोग इस बार नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, 30 लाख प्रगणकों की एक विशाल फौज सीधे मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल (CMMS) के जरिए डेटा एकत्र करने के लिए मैदान में उतरेगी। इस उन्नत तकनीक के कारण न केवल डेटा संकलन में लगने वाले कई वर्षों का समय बचेगा, बल्कि आँकड़ों की सटीकता भी कई गुना बढ़ जाएगी।

नागरिकों की सुविधा और बढ़ती डिजिटल साक्षरता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘स्व-गणना’ का अभूतपूर्व विकल्प पेश किया है। RGI मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा है कि लोग अपना डेटा खुद भरने के लिए मोबाइल फोन और लैपटॉप का उपयोग कर सकते हैं। यह सुविधा प्रगणकों के आपके घर आने से ठीक 15 दिन पहले एक विशेष वेब पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी। जो नागरिक खुद अपना डेटा दर्ज कर लेंगे, उन्हें प्रगणक के आने पर केवल एक रेफरेंस नंबर देना होगा, जिससे समय की भारी बचत होगी।

जातिगत आँकड़े और 2029 के परिसीमन पर सीधा प्रभाव

यह जनगणना भारतीय राजनीति और सामाजिक नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होने वाली है। 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय जनगणना के तहत जातियों का विस्तृत विवरण आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाएगा। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती जातिगत जनगणना की पद्धति को लेकर है। RGI ने स्वयं स्वीकार किया है कि दूसरे चरण में जातियों को वैज्ञानिक तरीके से गिनने का तरीका अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है और विशेषज्ञों के सुझावों पर गहन अध्ययन जारी है।

इन आँकड़ों का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रभाव देश के चुनावी नक्शे पर पड़ेगा। वर्ष 1976 के बाद से लोकसभा सीटों का परिसीमन रुका हुआ है। 2027 में आने वाले नए जनसांख्यिकीय आँकड़े ही आगामी परिसीमन का मुख्य आधार बनेंगे, जिसका सीधा असर 2029 के आम चुनावों और संसद में राज्यों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। यह डेटा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए सटीक लाभार्थी सूची तैयार करने में भी सरकार की मदद करेगा। चूंकि यह पूरी प्रक्रिया इंटरनेट और सर्वर पर आधारित है, इसलिए साइबर सुरक्षा और डेटा हैकिंग जैसी चुनौतियाँ भी सरकार के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं।

नागरिकों के डेटा की गोपनीयता और कानूनी सुरक्षा

इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा एकत्र होने के कारण नागरिकों के मन में प्राइवेसी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। इन चिंताओं को दूर करते हुए सरकार ने कानूनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। RGI के दिशानिर्देशों के अनुसार, एकत्र किया गया व्यक्तिगत डेटा ‘जनगणना अधिनियम, 1948’ (Census Act 1948) के तहत कड़ाई से गोपनीय रखा जाएगा।

कानून के अनुसार, किसी भी नागरिक का निजी विवरण न तो किसी अन्य सरकारी एजेंसी या पुलिस के साथ साझा किया जा सकता है, न ही इसे किसी न्यायालय में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। जनगणना का यह व्यक्तिगत डेटा RTI (सूचना का अधिकार) के दायरे से भी पूरी तरह बाहर रहेगा। आम लोगों में फैले भ्रम को दूर करते हुए यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि इस जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट नहीं किया जाएगा। नागरिक बिना किसी डर या प्राइवेसी की चिंता के इस राष्ट्रीय अभियान में हिस्सा ले सकते हैं।

डिजिटल जनगणना 2027 केवल आबादी गिनने का एक सामान्य सरकारी अभ्यास नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल भविष्य की एक महत्वपूर्ण नींव है। जिस तेजी से तकनीकी बदलाव हो रहे हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार जातिगत आँकड़ों की जटिलताओं को कैसे सुलझाती है। इस जनगणना से प्राप्त होने वाले सटीक आँकड़े भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दिशा को अगले एक दशक के लिए एक नई शक्ल प्रदान करेंगे।

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