नई दिल्ली। भारत सरकार ने 2025-26 के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक 1,06,530 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इस विशाल निवेश का मुख्य उद्देश्य न केवल घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है, बल्कि देश को ‘मेडिकल वैल्यू टूरिज्म’ का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाना है। इस नई नीति के केंद्र में आयुष और एलाइड हेल्थ वर्कफोर्स का अभूतपूर्व विस्तार है, जिसके जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
बजट 2026 और आयुष और एलाइड हेल्थ वर्कफोर्स का विस्तार
हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बजट में 10 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इस बढ़े हुए बजट का एक बड़ा हिस्सा आयुष और एलाइड हेल्थ वर्कफोर्स की क्षमताओं को मजबूत करने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में निवेश किया जाएगा।
| विवरण | प्रमुख आंकड़े और तथ्य |
|---|---|
| कुल स्वास्थ्य बजट | 1,06,530 करोड़ रुपये (10% की वृद्धि) |
| प्रशिक्षण लक्ष्य | अगले 5 वर्षों में 1 लाख एलाइड हेल्थ पेशेवर |
| केयरगिवर्स का प्रशिक्षण | 1.5 लाख केयरगिवर्स को उच्चस्तरीय ट्रेनिंग |
| कैंसर रोगियों को राहत | 17 नई कैंसर दवाओं पर 100% कस्टम ड्यूटी में छूट |
यह संपूर्ण विस्तार ‘नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशंस एक्ट, 2021’ (NCAHP Act 2021) के सख्त विनियामक मानकों के तहत संचालित किया जाएगा। आम जनता को गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज से बचाने के लिए कैंसर की 17 महत्वपूर्ण दवाओं से आयात शुल्क पूरी तरह हटा लिया गया है।
मेडिकल टूरिज्म और बुनियादी ढांचे का विकास
भारत को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दुनिया की पहली पसंद बनाने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश किया जा रहा है। सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 5 नए ‘रीजनल मेडिकल हब’ स्थापित करने की घोषणा की है। ये हब अंतरराष्ट्रीय स्तर के होंगे जो विदेशी मरीजों को आकर्षित करके विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाएंगे और ग्रामीण व अर्ध शहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए लाखों रोजगार भी पैदा करेंगे।
विदेशी मरीजों और घरेलू मांग को देखते हुए सरकार 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) स्थापित कर रही है। इसके अलावा, गुजरात के जामनगर स्थित ‘WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर’ को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जाएगा। यह कदम आयुष प्रणालियों को वैश्विक मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सरकारी नीतियों और बुनियादी ढांचे में सुधार का असर साफ दिख रहा है। 1973 में जहां एक भारतीय की औसत जीवन प्रत्याशा 49.7 वर्ष थी, वहीं 2023 में यह बढ़कर 70.3 वर्ष तक पहुंच गई है। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब 12 करोड़ से अधिक कमजोर परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जा रहा है।
बदलती बीमारियां और नई स्वास्थ्य तकनीक
भारत ने संक्रामक रोगों से तो काफी हद तक लड़ाई जीत ली है, लेकिन आज देश के सामने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गैर संचारी रोग (NCDs) जैसे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग अब देश के कुल रोग बोझ का 56.4% हिस्सा बन चुके हैं।
इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए होलिस्टिक चिकित्सा को बढ़ावा दिया जा रहा है। CCRAS ने शिक्षा मंत्रालय के Anuvadini AI के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस एआई टूल के माध्यम से प्रमाण-आधारित आयुर्वेद का अनुसंधान अब 13 भारतीय भाषाओं में आम जनता के लिए उपलब्ध होगा।
भारत का हेल्थकेयर सेक्टर अपनी नीतियों और निवेश के कारण तेजी से आगे बढ़ रहा है। WHO और अन्य वैश्विक संस्थाओं के मानकों पर खरा उतरने के लिए क्लीनिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। आयुष और एलाइड हेल्थ वर्कफोर्स का यह सुनियोजित विस्तार भारत को एक सशक्त और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य प्रणाली की ओर ले जाने की क्षमता रखता है।
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