नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर 13 मार्च 2026 की रात को अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे अहम तेल केंद्र खार्ग द्वीप पर मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे बड़े बमबारी अभियानों में से एक को अंजाम दिया। इस हमले में नौसैनिक माइन भंडारण केंद्र, मिसाइल बंकर और 90 से अधिक अन्य सैन्य ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए — जबकि तेल बुनियादी ढाँचे को जानबूझकर सुरक्षित रखा गया।
खार्ग द्वीप पर हमला क्यों?
खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट से महज़ 15 मील की दूरी पर स्थित है और ईरान के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है। ट्रंप ने Truth Social पर लिखा — “मेरे निर्देश पर अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक को अंजाम देते हुए खार्ग द्वीप के हर सैन्य ठिकाने को पूरी तरह तबाह कर दिया।”
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के मुताबिक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की समुद्र में माइन बिछाने की क्षमता को नष्ट करना था ताकि वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
‘डीसेंसी’ का फैसला और ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने कहा — “मैंने ‘decency’ के कारणों से द्वीप के तेल बुनियादी ढाँचे को नष्ट न करने का फैसला किया है। लेकिन अगर ईरान या कोई भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही में बाधा डाला तो मैं यह फैसला तुरंत बदल दूँगा।”
ईरान ने पलटवार करते हुए चेतावनी दी है कि अगर तेल बुनियादी ढाँचे पर हमला हुआ तो वह अमेरिका से जुड़े सभी तेल और ऊर्जा ठिकानों को “राख के ढेर में तब्दील” कर देगा।
अमेरिकी नुकसान और आगे की तैयारी
इस अभियान में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा — KC-135 रिफ्यूलिंग विमान के इराक में दुर्घटनाग्रस्त होने से सभी छह चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। इससे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में अमेरिकी सैनिकों की कुल मृत्यु संख्या 13 हो गई है।
31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट ओकिनावा, जापान से USS Tripoli पर सवार होकर मध्य पूर्व की ओर रवाना हो चुकी है जिसमें करीब 2,500 मरीन सैनिक, F-35 लड़ाकू विमान और V-22 ऑस्प्रे हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
Related Articles:
- ईरान युद्ध का भारत पर असर: क्या देश में होने वाली है LPG गैस की कमी?
- ईरान की सीक्रेट ‘मिसाइल सिटी’: होर्मुज़ में सुसाइड ड्रोन्स का जखीरा,
- UGC Bill 2026: छात्रों और यूनिवर्सिटियों के लिए क्या बदलेगा?
इंसानी कीमत
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी से अब तक अमेरिकी-इज़रायली हमलों में 1,444 लोगों की मौत हो चुकी है और 18,551 घायल हैं।
भारत और दुनिया पर असर
इस युद्ध की शुरुआत से अब तक तेल की कीमतें 40 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड उछलकर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 87 प्रतिशत आयात करता है — ऐसे में यह संकट सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगा।
खार्ग द्वीप पर यह हमला ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक दिन था। तेल बुनियादी ढाँचे को अभी बचाया गया है — लेकिन यह राहत अस्थायी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम के कोई संकेत नहीं हैं। आने वाले दिन वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और कूटनीति दोनों के लिए बेहद निर्णायक साबित होंगे।
