भारत में बेरोजगारी दर में गिरावट: रोजगार के नए अवसर बढ़े

नई दिल्ली | भारत में बेरोजगारी दर में गिरावट के ताज़ा सरकारी आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। PLFS (Periodic Labour Force Survey) के फरवरी 2026 के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, भारत की समग्र बेरोजगारी दर घटकर 4.9% रह गई है — जो नवंबर 2025 के रिकॉर्ड निम्न स्तर 4.7% के करीब है।

बेरोजगारी दर में गिरावट के ताज़ा आंकड़े

PLFS के मासिक आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर नवंबर 2025 में 4.7% के रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुँची, जो जून 2025 में 5.6% थी। जनवरी 2026 में यह थोड़ी बढ़कर 5.0% हुई, लेकिन फरवरी 2026 में फिर घटकर 4.9% पर आ गई। शहरी बेरोजगारी दर फरवरी में 6.6% रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह 4.2% पर स्थिर रही। विशेषज्ञ इस सुधार को विनिर्माण, निर्माण, खुदरा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ते रोजगार सृजन से जोड़ रहे हैं।

SMEs और सरकारी योजनाओं का योगदान

रोजगार के अवसरों में वृद्धि का एक बड़ा कारण छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) द्वारा भर्ती में तेजी है। इसके साथ ही, PM कौशल विकास योजना (PMKVY) और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है। Make in India और Atmanirbhar Bharat जैसी योजनाओं के तहत विनिर्माण क्षेत्र में भर्ती में भी तेजी देखी गई है।

IT और निर्माण क्षेत्र में बढ़ी नौकरियाँ

प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवा उद्योग लगातार फल-फूल रहे हैं, जिसमें सॉफ्टवेयर, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड सॉल्यूशंस में लाखों को रोजगार मिल रहा है। फिनटेक, ई-कॉमर्स और ग्रीन एनर्जी जैसे स्टार्टअप क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोल रहे हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर बढ़े हैं। महिला बेरोजगारी दर भी फरवरी 2026 में घटकर 5.1% रह गई, जो जनवरी में 5.6% थी।

चुनौतियाँ अभी भी बरकरार

हालांकि बेरोजगारी दर में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्थायी और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हर साल करीब 50 लाख स्नातक नौकरी बाजार में आते हैं, जबकि उस अनुपात में स्नातक स्तरीय नौकरियाँ नहीं बन पा रहीं। युवाओं के लिए स्थिर और दीर्घकालिक नौकरियों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिस पर सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम कर रहे हैं।

आगे की योजनाएं

सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में नई औद्योगिक नीतियों और निवेश योजनाओं की घोषणा की जाएगी। इसका उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और बढ़ाना और आर्थिक विकास को गति देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते पूंजीगत खर्च और बिजनेस कॉन्फिडेंस में सुधार से रोजगार बाजार में और सुधार देखने को मिल सकता है।

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