ओरेकल छंटनी: भारत में 12,000 कर्मचारियों की गई नौकरी, जल्द एक और राउंड की संभावना

नई दिल्ली। अमेरिकी आईटी दिग्गज ओरेकल ने भारत में लगभग 12,000 कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया है। यह ओरेकल छंटनी कंपनी के उस बड़े वैश्विक पुनर्गठन का हिस्सा है, जिसके तहत दुनियाभर में कुल 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई है। प्रभावित कर्मचारियों को ईमेल के माध्यम से सूचित किया गया है कि ‘ऑर्गेनाइजेशनल बदलावों’ के कारण उनकी भूमिकाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं।

एआई निवेश और नेतृत्व परिवर्तन का असर

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर कंपनी के आक्रामक विस्तार से जुड़ा है। सितंबर 2025 में जब क्ले मागौयर्क और माइक सिसिलिया ने सह-सीईओ का पदभार संभाला था, तभी से कंपनी ने अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव किए हैं।

कंपनी अब अपना अधिकांश पूंजीगत निवेश पारंपरिक आईटी सेवाओं से हटाकर पूरी तरह से एआई डेटा सेंटर्स के निर्माण पर लगा रही है। इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव ओरेकल फ्यूजन क्लाउड एप्लिकेशन और ओरेकल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (OCI) जैसे डिवीजनों पर पड़ा है, जहां पारंपरिक भूमिकाओं को खत्म किया गया है।

कर्मचारियों के लिए सेवरेंस पैकेज और शर्तें

इस वित्तीय और मानसिक संकट के बीच कंपनी की ओर से प्रभावित कर्मचारियों को एक सेवरेंस पैकेज दिया जा रहा है। हालांकि, इस पैकेज का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को ‘स्वैच्छिक इस्तीफा’ देना अनिवार्य किया गया है — जिसकी विशेषज्ञ और कर्मचारी दोनों कड़ी आलोचना कर रहे हैं।

कानूनी दांवपेंच और भारत के श्रम कानून

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ‘स्वैच्छिक इस्तीफे’ की यह शर्त मुख्य रूप से भारतीय श्रम कानूनों से बचने की एक सोची-समझी रणनीति है। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत 100 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को कानूनी छंटनी से पहले सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होती है। ‘इस्तीफा’ दिखाकर कंपनी सीधे तौर पर इस कड़े कानून के दायरे से बाहर निकल रही है।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर वहां के सख्त स्थानीय कानूनों के कारण अधिक निशाना साधा गया है, क्योंकि वहां के नागरिकों को निकालना कानूनी रूप से मुश्किल है। भारत में काम के भारी दबाव और 16 घंटे की शिफ्ट का विरोध करने वाले कर्मचारियों को सितंबर में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।

जल्द आ सकता है छंटनी का एक और बड़ा दौर

ओरेकल इंडिया में काम करने वाले लगभग 30,000 कर्मचारियों में से करीब 40% कार्यबल इस फैसले से प्रभावित हुआ है। एचआर विभाग से जुड़े सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि अगले 30 दिनों के भीतर भारत में छंटनी का एक और ‘मास लेऑफ’ आने की पूरी आशंका है।

ओरेकल जैसी विशाल कंपनी में इतने बड़े पैमाने पर हो रही इस कटौती का सीधा असर भारत के संपूर्ण आईटी इकोसिस्टम पर पड़ेगा। इसके कारण वेंडर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स और ओरेकल की सेवाओं पर निर्भर छोटी कंपनियों को भी आने वाले समय में वित्तीय झटके का सामना करना पड़ेगा।

एआई-केंद्रित पुनर्गठन की यह लहर भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है — अगले 30 दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।

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