हाल ही में मध्य पूर्व (Middle East) का सैन्य संघर्ष भारत के समुद्री पड़ोस तक पहुँच गया है। 4 मार्च 2026 को अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह गाले (Galle) से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर, हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ (IRIS Dena) को टॉरपीडो से मार गिराया। इस घटना ने न केवल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और भड़का दिया है, बल्कि भारत के रणनीतिक समुद्री क्षेत्र में भी गंभीर चिंताएं और कई सवाल पैदा कर दिए हैं।
असल में क्या हुआ?
हमला और जानमाल का नुकसान: अमेरिकी पनडुब्बी ने जहाज को नष्ट करने के लिए एक शक्तिशाली ‘मार्क 48’ (Mark-48) टॉरपीडो का इस्तेमाल किया। IRIS Dena पर उस समय लगभग 180 नौसैनिक सवार थे। श्रीलंकाई नौसेना के बचाव अभियान के अनुसार, इस भयावह हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों के शव बरामद किए गए, 32 लोगों को बचाकर गाले के अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि 61 लोग अभी भी लापता हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पुष्टि की कि द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद — जहाँ आखिरी बार 14 अगस्त 1945 को किसी दुश्मन जहाज को डुबाया गया था — यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से किसी दुश्मन के जहाज को नष्ट किया है। यह हमला अमेरिका के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) का हिस्सा था, जिसके तहत अमेरिका ने ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया है।
जहाज की स्थिति — एक विवादित पहलू: ईरानी राजदूत के अनुसार, IRIS Dena निहत्थी (unarmed) थी, क्योंकि MILAN जैसे अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेने वाले जहाज “शांति प्रोटोकॉल” के तहत बिना हथियारों के भेजे जाते हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
भारत से संबंध: यह जहाज कोई आम गश्त पर नहीं था; यह 15–25 फरवरी 2026 के दौरान विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित ‘मिलन 2026’ (MILAN 2026) अभ्यास और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के बाद ईरान वापस लौट रहा था। इस अभ्यास में 74 देशों के प्रतिनिधि और 18 विदेशी युद्धपोत शामिल हुए थे।
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भारत के लिए चिंता और भू-राजनीतिक प्रभाव
यद्यपि यह हमला भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) के बाहर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ, लेकिन इसके भू-राजनीतिक परिणाम भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
1. ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसे इस “समुद्री अत्याचार” का भारी पछतावा होगा। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि ‘आईआरआईएस देना’ भारतीय नौसेना की अतिथि थी और बिना किसी चेतावनी के उस पर हमला किया गया।
2. भारत की सतर्क चुप्पी: उल्लेखनीय है कि हमले के 24 घंटे से अधिक समय बाद तक भारतीय नौसेना ने कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया और न ही मोदी सरकार ने इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। यह भारत की उस नाजुक कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ वह अमेरिका और ईरान — दोनों से संतुलित संबंध रखता है।
3. भारत की आंतरिक राजनीति: इस घटना ने भारत में भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए हैं और चिंता व्यक्त की है कि विदेशी शक्तियों का संघर्ष अब सीधे भारत के प्रभाव वाले हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) तक आ गया है।
4. समुद्री व्यापार पर खतरा: हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में महाशक्तियों के बीच सैन्य टकराव से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा परिवहन को भारी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच का यह सीधा टकराव दर्शाता है कि मध्य पूर्व का युद्ध अब अपने भौगोलिक दायरे से बाहर निकल रहा है। हिंद महासागर में इस तरह की हिंसक घटनाएं न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौती पेश करती हैं — विशेष रूप से जब एक भारतीय नौसैनिक अभ्यास में आमंत्रित अतिथि जहाज को भारत के समुद्री पड़ोस में ही निशाना बनाया जाए।
स्रोत: अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon), श्रीलंकाई नौसेना, ईरानी विदेश मंत्रालय, और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियाँ — मार्च 2026
