जल जीवन मिशन 2.0: केंद्र सरकार ने 5 राज्यों को जारी किए ₹1,561 करोड़, 2028 तक बढ़ी योजना

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ठेकेदारों की अनियमितताओं और लागत से जुड़ी चिंताओं के कारण पिछले साल रोकी गई फंडिंग को बहाल कर दिया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत देश के पांच प्रमुख राज्यों के लिए ₹1,561.53 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना का विस्तार दिसंबर 2028 तक कर दिया गया है, ताकि देश के हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित किया जा सके।

किन 5 राज्यों को मिला जल जीवन मिशन 2.0 का नया फंड?

दिसंबर 2024 में वित्तीय अनियमितताओं और लागत को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने की व्यापक शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने इस योजना के फंड पर रोक लगा दी थी। अब सख्त सुधारों और नए समझौता ज्ञापनों की शर्तों को लागू करने के बाद मार्च 2026 में फंडिंग को फिर से शुरू किया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह धनराशि उन राज्यों को प्रदान की गई है जिन्होंने नए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस नई किस्त में सबसे बड़ी हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश के हिस्से में आई है। राज्यों को जारी किए गए फंड का विवरण इस प्रकार है:

राज्य का नामजारी की गई धनराशि
उत्तर प्रदेश₹792.93 करोड़
छत्तीसगढ़₹536.53 करोड़
मध्य प्रदेश₹154.02 करोड़
ओडिशा₹65.31 करोड़
महाराष्ट्र₹12.74 करोड़

बढ़ा हुआ बजट और 2028 तक योजना का विस्तार

मूल रूप से अगस्त 2019 में शुरू की गई इस योजना का प्रारंभिक लक्ष्य 2024 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाना था। लेकिन 100% कवरेज प्राप्त न हो पाने के कारण, 10 मार्च 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने इसे जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में दिसंबर 2028 तक के लिए विस्तारित कर दिया है। 2019 में केवल 16.7% (3.23 करोड़) ग्रामीण घरों में पानी का कनेक्शन मौजूद था, जो अब 15.80 करोड़ (81.61%) ग्रामीण परिवारों तक पहुंच चुका है।

सुजलाम भारत और संरचित सत्यापन प्रणाली की शुरुआत

जल जीवन मिशन 2.0 का ध्यान अब केवल बुनियादी ढांचा निर्माण पर केंद्रित नहीं है, बल्कि सरकार का जोर अब ‘नागरिक केंद्रित सेवा वितरण’ पर है। काम में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए “सुजलाम भारत” नाम से एक नया राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत हर गांव को डिजिटल रूप से ट्रैक करने के लिए एक ‘सुजल गांव आईडी’ प्रदान की जाएगी।

पेयजल और स्वच्छता सचिव अशोक केके मीणा ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘संरचित सत्यापन’ को सख्ती से लागू किया गया है। इस सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह पास करने के बाद ही राज्यों को अगली किस्तों का फंड जारी किया जाएगा।

राज्य सरकारों के लिए सख्त चेतावनी और जवाबदेही

इस नए चरण में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय अनुशासन बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी दी है कि तकनीकी मानकों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन करने या गैर जरूरी बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने पर केंद्र कोई भुगतान नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकारों को स्वयं उठाना होगा।

कड़े नियमों और डिजिटल ट्रैकिंग के साथ अब सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक देश के हर ग्रामीण घर तक नल का साफ जल पहुंचाना है।

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