ईरान का सऊदी अरब में US बेस पर हमला: E-3 Sentry AWACS तबाह, 10+ सैनिक घायल

रियाद | मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। 27 मार्च 2026 को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान ने एक घातक मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इस हमले में अमेरिका का करीब 300 मिलियन डॉलर मूल्य का E-3 Sentry AWACS विमान पूरी तरह नष्ट हो गया और कम से कम 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए — जिनमें से दो की हालत गंभीर है। इस हमले ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भारी तबाही

सऊदी अरब की राजधानी रियाद से 96 किलोमीटर दूर स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। उपग्रह छवियों और फुटेज से पुष्टि हुई है कि बेस के टैक्सीवे पर खड़ा E-3 Sentry AWACS (सीरियल नंबर 81-0005) हमले में जलकर खाक हो गया। यह युद्ध के इतिहास में किसी E-3 Sentry विमान का पहला पुष्ट कॉम्बैट लॉस है।

घायल 12 सैनिकों में से दो गंभीर हालत में हैं। इसके अलावा बेस पर मौजूद कई KC-135 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकरों को भी भारी नुकसान पहुँचा है। इस व्यापक संघर्ष में अब तक 300 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं और कम से कम 13 की जान जा चुकी है।

E-3 Sentry AWACS का रणनीतिक महत्व

बोइंग द्वारा निर्मित E-3 Sentry एक उन्नत हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली (Airborne Warning and Control System) है। यह विमान युद्धक्षेत्र में दुश्मन के विमानों और मिसाइलों की निगरानी करता है, अपने लड़ाकू विमानों को दिशा-निर्देश देता है और पूरे वायु अभियान की कमान संभालता है। इसे आधुनिक युद्ध का ‘आँख और कान’ कहा जाता है।

E-3 विमान के नष्ट होने से मध्य पूर्व में अमेरिकी वायुसेना की ‘बैटलस्पेस अवेयरनेस’ में एक बड़ी कमी आई है। बचे हुए गिने-चुने विमानों पर काम का दबाव काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि ये विमान पहले से ही पुरानी तकनीक और भारी रखरखाव की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

E-3 Sentry AWACS — मुख्य तथ्य निर्माता: बोइंग (अमेरिका) कीमत: लगभग $300 मिलियन प्रति विमान कार्य: हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र नियंत्रण, रडार चेतावनी नष्ट विमान: सीरियल नंबर 81-0005 ऐतिहासिक महत्व: युद्ध में नष्ट हुआ पहला E-3 Sentry विमान स्थान: प्रिंस सुल्तान एयर बेस, रियाद से 96 किमी दूर

अमेरिका-ईरान युद्ध की पृष्ठभूमि

खाड़ी क्षेत्र में हुआ यह हमला कोई अचानक की घटना नहीं है। यह फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान का सीधा परिणाम है। दोनों देशों ने ईरानी सैन्य और औद्योगिक ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

सऊदी अरब के संप्रभु हवाई क्षेत्र में अमेरिकी बेस पर ईरानी हमला सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा रहा है। इसके जवाब में अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ का प्रयोग करते हुए अपनी सैन्य उपस्थिति को आक्रामक रूप से बढ़ा रहा है।

आगे क्या होगा?

$300 मिलियन के विमान के नुकसान के बाद अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े सैन्य कदम उठाने की स्थिति में है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की लगातार चेतावनियों और अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती को देखते हुए, आने वाले दिनों में यह संघर्ष वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।

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