नई दिल्ली। भारत का स्टार्टअप सेक्टर तेजी से परिपक्व हो रहा है। मार्च 2026 तक देश में 6.53 लाख से अधिक स्टार्टअप रजिस्टर हो चुके हैं और 125 यूनिकॉर्न के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। इन यूनिकॉर्न की कुल वैल्यूएशन 366 अरब डॉलर से अधिक है।
2025 में $11 अरब की फंडिंग
2025 में भारतीय स्टार्टअप्स ने 936 डील्स में 11 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई। हालांकि निवेशक अब अधिक सावधानी से पैसा लगा रहे हैं — सीड स्टेज फंडिंग 30% घटकर 1.1 अरब डॉलर रही। लेकिन ग्रोथ स्टेज निवेश 14% बढ़ा, जो इस बात का संकेत है कि अब जल्दबाजी में नहीं बल्कि मजबूत बिजनेस मॉडल वाले स्टार्टअप्स में पैसा लग रहा है।
2025 में 6 नए यूनिकॉर्न
2025 में Netradyne, Porter, Drools, Fireflies.ai, Jumbotail और Dhan — इन छह स्टार्टअप्स ने यूनिकॉर्न क्लब में प्रवेश किया। 2026 में अब तक Juspay पहला नया यूनिकॉर्न बना है। बेंगलुरु 52 यूनिकॉर्न के साथ देश की यूनिकॉर्न कैपिटल बनी हुई है, इसके बाद दिल्ली-NCR में 40 और मुंबई में 18 यूनिकॉर्न हैं।
IPO का नया दौर
2025 में 42 टेक कंपनियों ने IPO के जरिए पूंजी जुटाई, जो 2024 के 36 IPO से 17% अधिक है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से अब स्टार्टअप्स विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम कर रहे हैं। देश के कुल स्टार्टअप फंडिंग में भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी 2020 के 28% से बढ़कर 2024 में 45% हो गई।
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AI और फिनटेक सबसे आगे
निवेशकों का सबसे अधिक ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपटेक और फिनटेक पर है। Razorpay, CRED और Groww जैसी कंपनियां भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी हैं। 2025 की पहली छमाही में ही 470 डील्स में 5.7 अरब डॉलर की फंडिंग आई।
