नई दिल्ली | Taaza Khabar Desk. — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र से पहले सभी राजनीतिक दलों से एक ऐतिहासिक अपील की है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में आवश्यक संशोधनों के लिए सभी सांसदों से सर्वसम्मति से समर्थन माँगा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों से ही संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है।
संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख “Together, let us empower our Nari Shakti!” के माध्यम से स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण बिल में संशोधन महज एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। सरकार 16 अप्रैल को संसद में संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इस संशोधन से यह कानून 2034 तक टालने की बजाय 2029 के आम चुनावों में ही लागू किया जा सकेगा।
वर्तमान में 18वीं लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी मात्र 15% के करीब है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है। पीएम मोदी ने 4 अप्रैल को इस विशेष सत्र की घोषणा करते हुए कहा कि “2029 की लोकसभा में हमारी बहनों को 33% सीटें मिलनी चाहिए — यह अब और नहीं टाला जा सकता।”
2023 का ऐतिहासिक कानून और परिसीमन की कानूनी चुनौती
सितंबर 2023 में भारतीय संसद ने 106वें संविधान संशोधन के रूप में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पारित किया था। लोकसभा में इसके पक्ष में 454 और विरोध में केवल 2 वोट पड़े थे। राज्यसभा ने इसे सर्वसम्मति से 214-0 से पास किया था।
हालाँकि मूल प्रावधान के अनुसार यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होना था, जिससे इसके 2034 तक टलने की आशंका थी। अब केंद्र सरकार नए संवैधानिक संशोधनों के जरिए 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन करने और 2029 से ही आरक्षण लागू करने की रूपरेखा तैयार कर चुकी है।
816 सीटों का नया फॉर्मूला और दक्षिण भारत की चिंताएँ
| विवरण | आँकड़े |
|---|---|
| वर्तमान लोकसभा सीटें | 543 सीटें |
| प्रस्तावित नई लोकसभा सीटें | 816 सीटें |
| महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें | 273 सीटें (33%) |
| लागू होने का वर्ष | 2029 लोकसभा चुनाव |
दक्षिण भारतीय राज्यों को जनसंख्या आधारित परिसीमन से अपनी सीटें घटने का डर था। पीएम मोदी ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि किसी भी राज्य की मौजूदा सीटें कम नहीं होंगी — महिलाओं की सीटें अतिरिक्त सीटों के रूप में जोड़ी जाएँगी।
विपक्ष का रुख और राजनीतिक विवाद
कांग्रेस ने इस विशेष सत्र के समय पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बीच यह सत्र आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस ने माँग की है कि 29 अप्रैल को चुनाव समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। हालाँकि पीएम मोदी ने कांग्रेस को बैठक के लिए आमंत्रित किया है और कहा है कि “महिलाओं के अधिकारों को राजनीति की भेंट नहीं चढ़ाना चाहिए।”
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महिला सशक्तिकरण का महत्त्व
राजनीति विज्ञान के शोधकर्ताओं के अनुसार विधायी संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के कल्याण से जुड़ी नीतियों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। World Bank के अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि राजनीति में महिलाओं की अधिक भागीदारी संस्थागत पारदर्शिता को बेहतर बनाती है। पंचायती राज संस्थानों में 33% आरक्षण का अनुभव यह दर्शाता है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से जमीनी स्तर पर नीति निर्माण अधिक समावेशी बनता है।
16 अप्रैल 2026 का विशेष सत्र भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम पड़ाव है। सभी राजनीतिक दलों का रुख यह तय करेगा कि 2029 के चुनावों में 273 महिला सांसदों की संसद में उपस्थिति संभव हो पाएगी या नहीं।
