हैदराबाद | केंद्र सरकार द्वारा 13 मार्च 2026 को संसद में पेश किए गए ट्रांसजेंडर्स संशोधन बिल 2026 के खिलाफ हैदराबाद के धरना चौक पर LGBTQIA+ समुदाय ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “हमारा शरीर, हमारे अधिकार” के नारे लगाए और इस बिल को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।
ट्रांसजेंडर्स संशोधन बिल 2026 में क्या है नया
नए संशोधन के तहत किसी भी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा नियुक्त मेडिकल बोर्ड की जांच से गुजरना होगा। इस बिल में ट्रांसजेंडर की परिभाषा को केवल जैविक कारणों और पारंपरिक सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानों जैसे किन्नर, हिजड़ा और जोगता तक सीमित कर दिया गया है।
कार्यकर्ता सूर्य राज यादव के अनुसार मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच की यह अनिवार्यता समुदाय के लोगों की निजता, शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। भारत की पहली ट्रांसजेंडर डॉक्टरों में से एक डॉ. प्राची राठौड़ ने भी स्पष्ट किया है कि वैज्ञानिक रूप से यह साबित करना संभव नहीं है कि कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर है या नहीं।
NALSA जजमेंट 2014 के अधिकारों पर खतरा
यह बिल सुप्रीम कोर्ट के NALSA जजमेंट 2014 यानी NALSA बनाम भारत संघ फैसले के सिद्धांतों के विपरीत जाता दिखता है। उस ऐतिहासिक फैसले ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता दी थी और स्वयं कथित लैंगिक पहचान को मौलिक अधिकार माना था।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा पेश इस बिल में स्वयं कथित पहचान के अधिकार को हटाने का प्रस्ताव है। हैदराबाद के एडवोकेट और ट्रांसमेन जी. किरण राज ने कहा कि लैंगिक पहचान एक व्यक्तिगत अनुभव है जिसे किसी बाहरी संस्था द्वारा तय नहीं किया जा सकता।
सजा के कड़े प्रावधान और ट्रांसजेंडर अधिकार भारत पर असर
बिल में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे को ट्रांसजेंडर पहचान अपनाने के लिए मजबूर करता है तो उसे 10 से 14 साल की कैद और 3 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
विशेषज्ञों की चिंता है कि यह बिल ट्रांसमेन, नॉन बाइनरी और जेंडर फ्लुइड व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण से बाहर कर सकता है। सरकार का तर्क है कि 2019 के अधिनियम में परिभाषा अस्पष्ट थी जिससे वास्तविक रूप से उत्पीड़ित व्यक्तियों की पहचान मुश्किल हो रही थी।
बिल के विरोध में अब तक 13,000 से अधिक लोग ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद यानी NCTP की एक सदस्य ने मंत्री को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि बिल बिना उचित परामर्श के पारित हुआ तो वह इस्तीफा दे देंगी।
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