नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 9 मार्च 2026 को इसरो के सहयोग से देश का पहला ‘राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रीन कवर इंडेक्स 2025-26’ जारी किया। इसरो के रिसोर्ससैट-2 सैटेलाइट और NDVI तकनीक की मदद से राजमार्गों के किनारे मौजूद हरियाली का वैज्ञानिक आकलन किया गया है।
सैटेलाइट से होगी हरियाली की निगरानी
इस इंडेक्स में जुलाई से दिसंबर 2024 तक का डेटा शामिल है। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की तकनीक से सड़क के दोनों ओर प्रति किलोमीटर हरियाली को प्रतिशत में मापा जाएगा। यह डेटा इसरो के भुवन जीआईएस पोर्टल पर आम जनता और नीति निर्माताओं के लिए उपलब्ध है।
कौन से राज्य आगे, कौन पीछे?
रिपोर्ट के अनुसार असम (53.16%) राजमार्ग हरियाली में देशभर में पहले स्थान पर है। इसके बाद गुजरात (46.91%) और तेलंगाना (43.57%) का नंबर आता है। वहीं हिमाचल प्रदेश (13.5%) सबसे कम ग्रीन कवर वाला राज्य रहा, जबकि दिल्ली (25.37%) भी निचले पायदान पर है।
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ठेकेदारों की जवाबदेही होगी तय
NHAI ने कहा कि अगले वार्षिक चक्रों में साल-दर-साल बदलावों को ट्रैक किया जाएगा। पहले हरियाली का आकलन मैन्युअल फील्ड इंस्पेक्शन से होता था, जो समय लेने वाला और कम सटीक था। अब सैटेलाइट निगरानी से वृक्षारोपण करने वाले ठेकेदारों की जवाबदेही सीधे तय होगी।
पर्यावरण और जलवायु लक्ष्यों में मददगार
यह पहल ‘ग्रीन हाईवे पॉलिसी 2015’ को लागू करने की दिशा में अहम कदम है। इससे भारत को पेरिस समझौते के तहत अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने और जैव विविधता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। भविष्य में AI और मशीन लर्निंग से यह प्रणाली और सटीक बनाई जाएगी।
