पृथ्वी की सतह हर दिन बदल रही है—चाहे वह ग्लेशियर का पिघलना हो, बाढ़ का बढ़ना हो, या जंगलों का कटना हो। ऐसे समय में विस्तृत, समयबद्ध डेटा से हमें प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। इस ज़रूरी सूचना को प्रदान करने के लिए 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा से NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar (NISAR) सैटेलाइट लॉन्च कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया।
दशक भर की वैज्ञानिक कूटनीति
2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, तब इस मिशन की नींव रखी गई। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भी ISRO और NASA की टीमें दूरसंचार के माध्यम से जुड़ी रहीं। कैलिफोर्निया, बेंगलुरु और श्रीहरिकोटा में पार्ट्स डिजाइन से लेकर इंटीग्रेशन और परीक्षण तक व्यापक कार्य हुआ। NASA JPL की डिप्टी चीफ साइन्टिस्ट स्यू ओवेन के अनुसार, “यह पहली बार था जब दोनों एजेंसियों ने हार्डवेयर साझेदारी के रूप में समान रूप से योगदान दिया।”
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कक्षा, रडार और मिशन जीवनचक्र
कक्षा एवं कवरेज
- Sun-synchronous polar orbit, लगभग 743 किलोमीटर ऊंचाई
- हर 12 दिन में पूरे ग्रह का पुनः सर्वेक्षण
- 90 दिनों का कमीशनिंग चरण, जिसमें उपकरण और संचार लिंक का परीक्षण
दोहा-आवृत्ति रडार (Dual-Frequency Radars)
- NASA का L-Band: गहरे वन क्षेत्र और मिट्टी के नीचे की परतों की स्टडी
- ISRO का S-Band: बर्फ, समुद्र की सतह, बारिश और नमी का अवलोकन
SweepSAR टेक्नोलॉजी
- से मिलीमीटर-स्तरीय परिवर्तन की पहचान
- सतत इमेजिंग द्वारा मिनटिक-स्तरीय अपडेट
मिशन जीवन
- डिज़ाइन जीवन: 5 वर्ष
- डेटा लेटेंसी: सेकंडों में लगभग वास्तविक समय में उपलब्ध

आपदा प्रबंधन के लिए क्रांतिकारी डेटा
NISAR से प्राप्त डेटा प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व-चेतावनी और प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार करेगा:
| प्राकृतिक आपदा | निगरानी/अलर्ट विधि |
|---|---|
| भूकंप | प्लेट मूवमेंट्स का शुरुआती पता लगाकर अलर्ट |
| सुनामी | समुद्र सतह में अचानक परिवर्तन का ट्रैक |
| बाढ़ और भूस्खलन | मिट्टी की नमी और स्थिरता का सतत निरीक्षण |
| ज्वालामुखी | स्थलाकृतिक विकृति के माप द्वारा संभावित विस्फोट का पूर्वानुमान |
| हिमनद (ग्लेशियर) गतिशीलता | बर्फ की गतिविधि और मोटाई में परिवर्तन का मॉडलिंग |
केस स्टडी: केरल बाढ़
मानसून के दौरान केरल में बाढ़ की आशंका के समय NISAR के मृदा नमी मानचित्र स्थानीय प्रशासन को पहले ही संकेत देते कि कहां मिट्टी संतृप्ति सीमा पार कर रही है। इससे समय पर निकासी योजनाएं लागू करके जान-माल की हानि को कम किया जा सकता है।
कृषि और पर्यावरण में नया युग
| क्षेत्र | उपयोग / लाभ |
|---|---|
| वनक्षरण मॉनिटरिंग | अमेज़न वर्षावन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध कटान का शीघ्र पता लगाना |
| फसल स्वास्थ्य अवलोकन | वृक्षावरण सूचकांक (NDVI) के माध्यम से फसल विकास और तनाव स्तर का आकलन |
| मृदा नमी मैपिंग | किसानों को बेहतर सिंचाई प्रबंधन में सहायता प्रदान करना |
| तूफान ट्रैकिंग | समुद्री तटों पर जल कटाव और तूफानों के मार्ग का पूर्वानुमान |
खुला डेटा और ज्ञान का लोकतंत्र
NISAR का समग्र डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगा:
- शोधकर्ता: जलवायु मॉडल व शहरी विकास अध्ययन
- सरकारें: आपदा चेतावनी व बुनियादी ढांचा योजना
- NGO: संरक्षण परियोजनाएं व राहत कार्य
- छात्र व शिक्षाविद: उपग्रह डेटा विश्लेषण के लिए व्यावहारिक अभ्यास
इससे विकासशील देशों को भी उन्नत पृथ्वी अवलोकन तकनीक का लाभ मिलेगा।
बुद्धिमान अवलोकन: AI और मशीन लर्निंग
NISAR के व्यापक डेटा सेट के विश्लेषण के लिए AI तथा मशीन लर्निंग का उपयोग होगा:
- पैटर्न पहचान: अवैध कटान के हॉटस्पॉट
- पूर्वानुमान मॉडल: बाढ़ की भविष्यवाणी
- अनियमितता पहचान: भवन संरचना या प्राकृतिक स्थलाकृति में अचानक परिवर्तन
AI-संचालित विश्लेषण से नीति-निर्माताओं को शीघ्र निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
ISRO के सुनहरे दिन: आगे की योजनाएँ
NISAR की सफलता के बाद ISRO के प्रमुख मिशन:
- Gaganyaan: पहले मानवयुक्त मिशन के लिए पुनःप्रवेश आंकलन
- Chandrayaan-4: लूनर सैंपल वापसी मिशन के लिए नेविगेशन में सहायता
- Aditya Mission: सौर अध्ययन व कैलिब्रेशन डेटा
- NGLV: अगली पीढ़ी के पुन: प्रयोज्य लॉन्च वाहनों का प्रदर्शन
इन अभियानों में NISAR का डेटा तकनीकी मजबूती प्रदान करेगा।
परियोजना नेतृत्व का दृष्टिकोण
NISAR ने पृथ्वी प्रणालियों को अभूतपूर्व विस्तार में देखने का अवसर दिया है,” कहते हैं Dr. S. Somanath, ISRO के महानिदेशक। NASA JPL की Dr. Sue Owen जोड़ती हैं, “यह मिशन विज्ञान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।”
भविष्य की विरासत
NISAR केवल पांच वर्षों के मिशन से अधिक है—यह आने वाली पीढ़ियों के लिए:
- समग्र पृथ्वी अवलोकन अभिलेखागार
- सार्वजनिक जलवायु डेटासेट
- भविष्य के इंडिया-यूएस अंतरिक्ष मिशन के लिए सहयोगात्मक ढांचा
आगे की राह
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के युग में, NISAR एक आशा की किरण है। वैज्ञानिक सहयोग और उन्नत तकनीक ने सीमाओं को पार करके हमें सशक्त डेटा प्रदान किया है, जिससे धरती की रक्षा के लिए त्वरित, सूचित और वैश्विक निर्णय संभव हुए हैं।
