भारत में तेजी से बढ़ रहा इलेक्ट्रिक बसों का नेटवर्क, दिल्ली से अयोध्या तक नई सेवाएं

नई दिल्ली। भारत में सार्वजनिक परिवहन को हरित और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देशभर के शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का जाल बिछा रही हैं।

दिल्ली बनेगी इलेक्ट्रिक बसों की राजधानी

राजधानी दिल्ली इस मोर्चे पर सबसे आगे है। फिलहाल दिल्ली में 4,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक यह संख्या 7,500 तक पहुंचाने का है। इसके अलावा दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल इंटरकनेक्टर यानी DEVi योजना के तहत 2,080 नई 9-मीटर इलेक्ट्रिक मोहल्ला बसें शुरू की जा रही हैं, जो तंग गलियों और कम भीड़ वाले इलाकों में कनेक्टिविटी देंगी। शहर के 44 बस डिपो में पहले ही ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है।

DTC का 17 शहरों तक विस्तार

दिल्ली परिवहन निगम अब अंतरराज्यीय मार्गों पर भी इलेक्ट्रिक बसें उतारने की तैयारी में है। योजना के तहत दिल्ली से अयोध्या, जयपुर, देहरादून, लखनऊ, जम्मू और चंडीगढ़ समेत 17 अंतरराज्यीय मार्गों पर इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू की जाएगी।

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अयोध्या और उत्तराखंड को भी सौगात

रामनगरी अयोध्या को हाल ही में 20 नई एसी इलेक्ट्रिक बसें मिली हैं, जो अयोध्या से प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ मार्गों पर चलेंगी। वहीं PM ई-बस सेवा योजना के तहत देहरादून को 100 और हरिद्वार को 37 नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। हरिद्वार में 2027 के अर्ध कुंभ को देखते हुए यह तैयारी खासी अहम मानी जा रही है।

बजट 2026 में पूर्वी भारत के लिए 4,000 ई-बसें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में ‘मिशन पूर्वोदय’ के तहत ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और उत्तर आंध्र प्रदेश में शहरी परिवहन को मजबूत करने के लिए 4,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का ऐलान किया है।

प्रदूषण और रोजगार दोनों पर असर

इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से शहरों में वायु प्रदूषण कम होने की उम्मीद है। उत्तराखंड परिवहन विभाग के अनुसार अकेले देहरादून-हरिद्वार की नई बस सेवा से करीब 750 नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह पहल केंद्र सरकार की FAME-II और PM e-DRIVE योजनाओं का भी हिस्सा है।

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