Germany ने एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए अपने 2025 के बजट में रक्षा खर्च और बुनियादी ढांचे के निवेश को प्राथमिकता दी है। यह फैसला रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदलती सुरक्षा चुनौतियों और घरेलू अर्थव्यवस्था की जरूरतों का सीधा नतीजा है। चांसलर ओलाफ स्कॉल्ज़ की सरकार इसे “Germany की नई सामरिक वास्तविकता” का नाम दे रही है।
रक्षा बजट: रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े
Germany ने 2025 के लिए 80 अरब यूरो (लगभग 7.2 लाख करोड़ रुपये) के रक्षा बजट की घोषणा की है। यह पहली बार है जब जर्मनी नाटो के 2% जीडीपी लक्ष्य को पार (2.1%) करेगा। इस बजट के प्रमुख बिंदु हैं:
- यूरोपीय मिसाइल डिफेंस सिस्टम में भारी निवेश
- अमेरिकी एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद
- साइबर युद्ध क्षमताओं का तेजी से विस्तार
- यूक्रेन को सैन्य सहायता में वृद्धि
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German रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के शब्दों में, “यह ‘ज़ीटेनवेंडे’ (ऐतिहासिक मोड़) के हमारे वादे को पूरा करने जैसा है। अब जर्मनी यूरोप की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।”
नई आर्थिक ताकत’
मध्यावधि अनुमानों से पता चला है कि जर्मनी 2029 तक रक्षा व्यय को 2024 में 2.1% से बढ़ाकर 3.5% आर्थिक उत्पादन तक ले जाएगा, जिसे लगभग 400 बिलियन यूरो के उधार कार्यक्रम के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।
जर्मनी का कुल रक्षा व्यय 2025 में 95 बिलियन यूरो से बढ़कर 2029 में 162 बिलियन यूरो होने की उम्मीद है।
पिस्टोरियस ने कहा, “यूरोप में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़े नाटो साझेदार के रूप में हमारे लिए, बाहरी सुरक्षा और रक्षा क्षमता का मुद्दा एक बार फिर सरकारी कार्रवाई में एक पूर्ण प्राथमिकता है।”
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर: टैंकों के साथ सड़कें भी
रक्षा के साथ-साथ जर्मनी बुनियादी ढांचे पर भी भारी निवेश करने जा रहा है। 2025 में इसके लिए 54 अरब यूरो (लगभग 4.86 लाख करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं। प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
- पुराने हो चुके रेल नेटवर्क (ड्यूशे बान) का आधुनिकीकरण
- हरित हाइड्रोजन ऊर्जा गलियारों का निर्माण
- 5जी और भविष्य की 6जी तकनीक के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
- देश भर में जर्जर हो चुके पुलों और सड़कों की मरम्मत
बड़ी चुनौती: ऋण ब्रेक बनाम सुरक्षा जरूरतें
यह भारी खर्च Germany के सख्त संवैधानिक “ऋण ब्रेक” नियम (सालाना कर्ज सीमा जीडीपी का 0.35%) को चुनौती देता है। सरकार का तर्क है कि रूस से उत्पन्न सुरक्षा खतरा इसे “राष्ट्रीय आपातकालीन उपाय” बनाता है। हालांकि, विपक्षी सीडीयू पार्टी ने चेतावनी दी है कि अतिरिक्त कर्ज से मुद्रास्फीति बढ़ सकती है, भले ही सुरक्षा प्राथमिकता हो।
हाल के दिनों में यूरोपीय रक्षा कंपनियों के शेयरों में उछाल आया है क्योंकि पूरे क्षेत्र में खर्च बढ़ाने की गति तेज हो रही है। जर्मन उपायों पर टिप्पणी करते हुए, बर्नबर्ग के अर्थशास्त्री होल्गर श्मिडिंग ने लिखा, “यह वास्तव में एक बड़ा झटका है।” “जर्मनी के राजकोषीय नियमों को तत्काल ढीला करने के इन प्रस्तावों को लागू किए जाने की संभावना है। ये जर्मनी के लिए एक बड़ा राजकोषीय परिवर्तन हैं।”
भारत के लिए संभावनाएं
Germany के इस ऐतिहासिक कदम के भारत के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं:
- रक्षा सहयोग: पनडुब्बी और मिसाइल प्रौद्योगिकी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत-जर्मनी साझेदारी के द्वार खुल सकते हैं।
- बुनियादी ढांचा निवेश: सीमेंस जैसी प्रमुख जर्मन कंपनियां भारत में हाई-स्पीड रेल और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ा सकती हैं।
- भू-राजनीतिक बदलाव: यूरोपीय रक्षा निर्भरता में अमेरिका से हटकर भारत-प्रशांत क्षेत्र की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति मजबूत होगी।
आर्थिक पैमाने पर प्रभाव
| क्षेत्र | 2024 बजट | 2025 बजट (प्रस्तावित) | परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| रक्षा | 52 अरब यूरो | 80 अरब यूरो | +54% |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | 41 अरब यूरो | 54 अरब यूरो | +32% |
| सामाजिक कल्याण | 172 अरब यूरो | 170 अरब यूरो | -1.2% |
अर्थशास्त्री इसे “संरचनात्मक समायोजन” बता रहे हैं। सामाजिक कल्याण खर्च में मामूली कटौती से जुड़े जोखिमों के बावजूद, सरकार का दावा है कि बेहतर बुनियादी ढांचा दीर्घकालिक आर्थिक विकास और रोजगार सृजन करेगा।
भविष्य की दिशा
Germany की यह दोहरी रणनीति – “बाहरी सुरक्षा मजबूत करना, आंतरिक बुनियाद ठीक करना” – पूरे यूरोप के लिए एक मॉडल बन सकती है। जैसा कि बर्लिन के एक प्रमुख थिंक टैंक के विश्लेषक ने कहा, “यह सिर्फ बजट नहीं, युद्ध के बाद के युग में जर्मनी की नई पहचान का निर्माण है।” भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए, यह सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है। सवाल यह है कि क्या जर्मनी इस महत्वाकांक्षी योजना को वित्तीय और राजनीतिक चुनौतियों के बीच सफलतापूर्वक लागू कर पाएगा। इसका उत्तर आने वाले वर्षों में यूरोप की सुरक्षा और आर्थिक परिदृश्य को नया आकार देगा।