जम्मू | जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिग्गज नेता फारूक अब्दुल्ला बुधवार रात जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक जानलेवा हमले में बाल-बाल बच गए। एक शादी समारोह से बाहर निकलते वक्त एक हमलावर ने उन पर पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली चलाई, लेकिन Z+ सुरक्षा कमांडो की तत्परता ने उनकी जान बचा ली। आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया गया।
क्या हुआ उस रात?
89 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता बीएस चौहान के पारिवारिक विवाह समारोह से बाहर आ रहे थे। इसी दौरान कमल सिंह जमवाल नामक 63 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने फौरन हमलावर को दबोच लिया और गोली का निशाना चूक गया। उनके साथ मौजूद उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी भी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
20 साल पुरानी रंजिश या कुछ और?
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी कमल सिंह जमवाल, जो पुरानी मंडी जम्मू का निवासी है, ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से फारूक अब्दुल्ला की हत्या की योजना बना रहा था। पुलिस के अनुसार हमले के वक्त वह संभवतः नशे की हालत में था। SP सिटी साउथ जम्मू अजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई आतंकी कोण नहीं है — यह विशुद्ध निजी रंजिश का मामला है।
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Z+ सुरक्षा में कैसे हुई चूक?
फारूक अब्दुल्ला को NSG कमांडो के साथ देश की सर्वोच्च Z+ सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा होता है। इसके बावजूद एक हथियारबंद व्यक्ति उनके इतने करीब पहुँच गया — यह खुफिया और सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता मानी जा रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘X’ पर लिखा, “अल्लाह मेहरबान है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि Z+ NSG सुरक्षा प्राप्त पूर्व CM के इतने करीब कोई हथियार लेकर कैसे पहुँच सकता है?” उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इसे स्थानीय प्रशासन की लापरवाही करार दिया।
आगे क्या?
यह घटना भले ही निजी दुश्मनी का नतीजा बताई जा रही हो, लेकिन जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में VIP सुरक्षा के मानकों पर गंभीर पुनर्विचार ज़रूरी हो गया है। आने वाले दिनों में सार्वजनिक कार्यक्रमों में एंटी-सैबोटाज चेकिंग और कड़ी की जाएगी। हाई-प्रोफाइल जांच में आगे और खुलासे हो सकते हैं।
