नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन — चंद्रयान-4 — की तैयारी में जुटा है। ISRO के अनुसार यह मिशन 2027-28 में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र कर उन्हें सुरक्षित धरती पर वापस लाना है — यह उपलब्धि अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही हासिल कर सके हैं।
₹2,104 करोड़ का बजट, Cabinet की मंजूरी
सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने चंद्रयान-4 को ₹2,104 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी। यह मिशन 36 महीनों में पूरा होने का लक्ष्य है। मिशन में उद्योग और शिक्षा जगत की भागीदारी होगी और सभी महत्वपूर्ण तकनीकें स्वदेशी रूप से विकसित की जाएंगी।
5 मॉड्यूल, 2 रॉकेट — बेहद जटिल मिशन
चंद्रयान-4 अब तक का ISRO का सबसे जटिल मिशन होगा। इसमें पांच अलग-अलग मॉड्यूल होंगे — डिसेंडर, असेंडर, ट्रांसफर, री-एंट्री और प्रोपल्शन मॉड्यूल — जिन्हें दो अलग LVM3 रॉकेटों से लॉन्च किया जाएगा। पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग के बाद ये मॉड्यूल एक इंटीग्रेटेड स्पेसक्राफ्ट बनाकर चांद की ओर रवाना होंगे। 2026 में इन तकनीकों का प्रोटोटाइप टेस्टिंग शुरू होगा।
2040 में इंसान को चांद पर भेजने की तैयारी
विज्ञान और तकनीक मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि चंद्रयान-4 उन बुनियादी तकनीकों को परखेगा जो 2040 में भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने के लिए जरूरी हैं। इसके अलावा 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन) स्थापित करने की भी योजना है।
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चंद्रयान-5 जापान के साथ, गगनयान 2026 में
चंद्रयान-4 के बाद चंद्रयान-5 मिशन जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के साथ मिलकर चलाया जाएगा जिसमें भारत लैंडर और जापान रोवर देगा। वहीं भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान 2026 में लॉन्च होने वाला है।
