लेह | राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत 170 दिनों की लंबी हिरासत के बाद जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता एवं नवप्रवर्तक सोनम वांगचुक की लद्दाख वापसी हो चुकी है। 22 मार्च 2026 को लेह के कुशो बकुला रिम्पोचे हवाई अड्डे पर पहुंचने पर स्थानीय नेताओं और हजारों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। उनकी रिहाई को केंद्र सरकार और लद्दाख के बीच रुके हुए संवाद को फिर से शुरू करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सोनम वांगचुक लद्दाख वापसी पर भव्य स्वागत
लेह पहुंचने पर लेह एपेक्स बॉडी यानी LAB और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी KDA के नेताओं सहित हजारों स्थानीय समर्थकों ने वांगचुक का गर्मजोशी से स्वागत किया। वांगचुक ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि लद्दाख का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और सभी का ध्यान पिछली गलतियों को सुधारने पर होना चाहिए।
उन्होंने रिहाई के साथ ही उन अन्य प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई और कानूनी राहत की मांग भी की जो अभी भी हिरासत में हैं।
हिरासत का कारण और रिहाई की कानूनी प्रक्रिया
वांगचुक और अन्य प्रमुख नेताओं को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कदम 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था, जिसके बाद उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
उनकी रिहाई तब संभव हुई जब गृह मंत्रालय यानी MHA ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट की धारा 14 का इस्तेमाल करते हुए 14 मार्च 2026 को उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी। यह कदम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई से ठीक पहले उठाया गया।
लद्दाख छठी अनुसूची मांग और संवैधानिक पृष्ठभूमि
लद्दाख आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के लिए विशेष संवैधानिक संरक्षण यानी छठी अनुसूची का दर्जा प्राप्त करना है। वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत यह दर्जा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम को प्राप्त है। यह दर्जा स्थानीय जनजातीय आबादी को स्वायत्त विकास परिषदों के माध्यम से अपनी भूमि, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कानून बनाने का अधिकार देता है।
लद्दाख के लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद उन्हें वही संवैधानिक सुरक्षा मिले जो अन्य जनजातीय क्षेत्रों को प्राप्त है। इसके साथ ही लद्दाख राज्य का दर्जा देने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा रही है।
आगे की राह
सोनम वांगचुक की लद्दाख वापसी के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद है। LAB और KDA ने संकेत दिए हैं कि वे केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते हिरासत में बंद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी रिहा किया जाए। फिलहाल केंद्र सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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