Term Insurance लेते समय ये 3 गलतियाँ बिल्कुल न करें – Claim Reject हो सकता है

Term insurance भारत में सबसे सस्ता और जरूरी जीवन बीमा विकल्प है। महज 8,000 से 10,000 रुपये के वार्षिक प्रीमियम में 50 लाख रुपये तक का कवर मिल जाता है। लेकिन पॉलिसी खरीदते समय कई लोग कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह से बाद में क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। जब परिवार को पैसों की सबसे अधिक जरूरत होती है, तब बीमा कंपनी क्लेम देने से मना कर देती है।

आइए जानते हैं वे तीन बड़ी गलतियां जो आपको नहीं करनी चाहिए।

1. धूम्रपान या शराब की आदत छुपाना

पॉलिसी फॉर्म भरते समय “क्या आप धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं?” जैसा सवाल पूछा जाता है। कई लोग प्रीमियम कम रखने के लिए इसका जवाब ‘नहीं’ लिख देते हैं। यह सबसे बड़ी भूल है।

बीमा कंपनियां क्लेम के समय पूरी जांच करती हैं। यदि मृत्यु के बाद मेडिकल रिकॉर्ड में निकोटीन के निशान या लिवर डैमेज के संकेत मिलते हैं, तो कंपनी पूरी पॉलिसी हिस्ट्री की जांच करती है। फॉर्म में झूठ पकड़ा गया तो क्लेम सीधे रिजेक्ट हो जाता है और परिवार को एक रुपया भी नहीं मिलता।

सही तरीका क्या है: यदि आप स्मोकर हैं तो ईमानदारी से घोषित करें। भले ही प्रीमियम 2,000 से 3,000 रुपये अधिक लगे, लेकिन क्लेम पक्का मिलेगा। बाद में यदि आप धूम्रपान छोड़ देते हैं तो कुछ कंपनियां प्रीमियम रिव्यू की सुविधा भी देती हैं।

Related Articles:

2. पहले से मौजूद बीमारियां न बताना

हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, अस्थमा जैसी बीमारियां आम लगती हैं, इसलिए लोग फॉर्म में इन्हें नहीं लिखते। लेकिन बीमा कंपनियों के लिए ये मेजर रेड फ्लैग हैं।

मृत्यु के बाद कंपनी पॉलिसीधारक के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के बिल, दवाइयों की रसीदें तक मंगवाती है। यदि पता चला कि पॉलिसी लेने से पहले से ब्लड प्रेशर की दवाई चल रही थी और फॉर्म में इसका उल्लेख नहीं किया गया, तो क्लेम रद्द हो जाता है।

क्या करना चाहिए: हर छोटी-बड़ी बीमारी की जानकारी दें। पारिवारिक इतिहास भी बताएं। यदि माता-पिता को हृदय रोग या कैंसर था तो उसका भी उल्लेख करें। मेडिकल टेस्ट ईमानदारी से दें – ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल आदि की सही रिपोर्ट होनी चाहिए।

3. पेशे या आय के बारे में गलत जानकारी देना

हाई-रिस्क जॉब जैसे ट्रक ड्राइवर, कंस्ट्रक्शन वर्कर, माइनर, पायलट, स्टंटमैन आदि का प्रीमियम अधिक होता है। कुछ लोग खुद को “ऑफिस कर्मचारी” या “व्यवसायी” बता देते हैं ताकि प्रीमियम कम रहे।

लेकिन कंपनी डेथ सर्टिफिकेट, नियोक्ता की जानकारी, आय प्रमाण सब वेरिफाई करती है। रिस्क कैटेगरी गलत पाई गई तो पॉलिसी रद्द हो जाती है।

आय भी सही बताएं: यदि आपकी सैलरी 30,000 रुपये है और आप 1 करोड़ का कवर ले रहे हैं, तो यह संदिग्ध लगता है। आय और कवर अमाउंट का अनुपात तर्कसंगत होना चाहिए। सैलरी स्लिप्स या ITR तैयार रखें।

नॉमिनी की जानकारी में गलती – बोनस समस्या

नॉमिनी का नाम, संबंध, जन्मतिथि सभी सही होनी चाहिए। स्पेलिंग मिस्टेक भी क्लेम सेटलमेंट में समस्या पैदा कर सकती है।

अंतिम चेकलिस्ट:

  • मेडिकल हिस्ट्री 100 प्रतिशत सही भरें
  • जीवनशैली की आदतें (धूम्रपान/शराब) ईमानदारी से बताएं
  • पेशा और आय सही बताएं
  • नॉमिनी की जानकारी वेरिफाई करके सेव करें
  • पॉलिसी दस्तावेज सुरक्षित रखें और परिवार को बताएं कहां हैं

थोड़ा अधिक प्रीमियम देना पड़े तो दे दें। पॉलिसी लेने का मतलब है परिवार को वित्तीय सुरक्षा देना। झूठ बोलकर पॉलिसी रद्द करवा दी तो फायदा किसी को नहीं होगा। ईमानदार रहें, क्लेम पक्का मिलेगा।

Leave a Comment

Generic selectors
Exact matches only
Search in title
Search in content
Post Type Selectors