टीबी मुक्त गुजरात: राज्य ने हासिल किया 94% लक्ष्य, जानें रिकवरी रेट

गांधीनगर | विश्व क्षय रोग दिवस 2026 पर टीबी मुक्त गुजरात अभियान ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गुजरात ने नीति आयोग द्वारा निर्धारित टीबी पंजीकरण और उपचार के 94 प्रतिशत लक्ष्यों को पूरा कर लिया है। यह प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान को नई गति दे रहा है।

गुजरात के टीबी आंकड़े — क्या कहती है रिपोर्ट?

गुजरात स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य को 1,40,000 टीबी मामलों की पहचान का लक्ष्य दिया गया था। इसके जवाब में 1,31,801 मरीजों को पंजीकृत किया गया। इनमें से 1,25,301 मरीजों को सक्रिय उपचार के दायरे में लाया गया और 1,21,912 मरीजों ने इलाज पूरा किया। राज्य ने 91.74 प्रतिशत की क्लीनिकल रिकवरी दर दर्ज की है जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक है।

निक्षय पोषण योजना — मरीजों को क्या मिलता है?

केंद्र सरकार की निक्षय पोषण योजना के तहत हर टीबी मरीज को इलाज के दौरान प्रतिमाह 1,000 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। 2025 में गुजरात सरकार ने 92,921 टीबी रोगियों को 49.10 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की। इसके अलावा क्राउडसोर्सिंग के जरिए 31,058 निक्षय मित्र पंजीकृत किए गए हैं जो मरीजों को अतिरिक्त पोषण और सहायता देते हैं।

100 दिवसीय अभियान और वैश्विक संदर्भ

WHO की 2023 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के कुल टीबी मामलों का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा भारत में है। भारत ने 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पांच साल पहले यानी 2025 तक टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया है। 24 मार्च 2026 को विश्व टीबी दिवस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय अभियान शुरू किया। इसका उद्देश्य उच्च-बोझ वाले क्षेत्रों में केस डिटेक्शन तेज करना है।

MDR-TB और बाकी चुनौतियां

उपलब्धियों के बावजूद चुनौतियां बाकी हैं। मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी यानी MDR-TB सबसे बड़ी चिंता है जिसमें पारंपरिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं और इलाज में अधिक समय व संसाधन लगते हैं। काम की तलाश में पलायन करने वाले प्रवासी मजदूरों को ट्रैक करना और निजी क्लीनिकों के छुपे हुए मामलों को राष्ट्रीय पोर्टल पर लाना अभी भी बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

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