नई दिल्ली. इजरायल-ईरान युद्ध के बीच 15 मार्च 2026 को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यरुशलम के The Sataf कैफे से एक वीडियो जारी किया जिसमें वे कॉफी पीते हुए अपनी मौत की अफवाहों का मजाक उड़ा रहे थे। लेकिन इस वीडियो ने विवाद खत्म करने की बजाय नया विवाद खड़ा कर दिया जब Elon Musk के AI chatbot Grok ने इसे 100% deepfake घोषित कर दिया।
मौत की अफवाहें कहाँ से शुरू हुईं?
13 मार्च को नेतन्याहू के एक संबोधन के वीडियो में रोशनी और परछाई के एक खास camera angle के कारण ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उनके दाहिने हाथ में छह उंगलियां हों। इसी दृश्य ने सोशल मीडिया पर उनकी मौत और AI द्वारा वीडियो बनाने की अफवाहों को जन्म दिया। 13-14 मार्च को नेतन्याहू के security cabinet meeting और military council meeting से अनुपस्थित रहने और उनके बेटे Yair Netanyahu का 9 मार्च के बाद X पर कोई post न करने से अफवाहें और तेज हो गईं। Iranian state media ने भी दावा किया कि नेतन्याहू एक Iranian strike में मारे गए।
The Sataf कैफे वीडियो और Grok का विवादित दावा
इन अफवाहों का जवाब देने के लिए नेतन्याहू ने 15 मार्च को Jerusalem Hills के The Sataf कैफे से video post किया। इसमें वे कॉफी पीते हुए Hebrew में pun करते हुए बोले कि वे coffee के लिए मर रहे हैं और साथ ही कैमरे के सामने दोनों हाथों की पाँचों उंगलियां दिखाईं।
लेकिन जैसे ही users ने Grok से वीडियो की authenticity पूछी, Grok ने लिखा — “यह AI-generated है। यह Benjamin Netanyahu का एक deepfake है जिसमें वे coffee shop में बैठकर Iran/Lebanon operations पर बात कर रहे हैं — ऐसी कोई real event exist नहीं करती।” बाद में Grok ने कहा — “100% sure — यह advanced AI deepfake है।” वास्तव में वीडियो में ऐसी कोई भी संवेदनशील बातचीत नहीं हुई थी — यह AI Hallucination का साफ उदाहरण था।
वीडियो असली था — तीन तरफ से पुष्टि
The Sataf कैफे ने खुद अपने social media accounts पर Netanyahu की visit की photos और videos share करके confirm किया कि वे 15 मार्च को वहाँ आए थे। Reuters ने file imagery से कैफे के interiors को verify किया। Snopes ने independent जांच में छह उंगलियों वाले दावे को optical illusion बताया और वीडियो को authentic घोषित किया। इजरायल के Prime Minister’s Office ने भी official statement जारी कर कहा कि PM पूरी तरह ठीक हैं।
दूसरा video और Grok का विरोधाभास
विवाद थमने के बजाय बढ़ता देख Netanyahu के office ने 16 मार्च को एक और video जारी किया जिसमें वे हरे-भरे पहाड़ों की background में लोगों से बात करते नजर आए। दिलचस्प बात यह है कि Grok ने अलग-अलग users को अलग-अलग जवाब दिए — कभी deepfake बताया, कभी authentic।
Euronews की fact-checking team The Cube ने X से इन Grok posts को हटाने का कारण पूछा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। Verification expert Tal Hagin ने कहा कि AI deepfake detectors probability पर काम करते हैं और इन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
AI Hallucination का खतरा
WEF की 2024 रिपोर्ट के अनुसार 53% वैश्विक विशेषज्ञ Generative AI से फैलने वाली भ्रामक जानकारी को दुनिया का सबसे बड़ा अल्पकालिक खतरा मानते हैं। भारत में IT Act 2000 की धारा 66D के तहत deepfake के जरिए धोखाधड़ी दंडनीय अपराध है। EU के AI Act 2024 में AI generated content पर labeling अनिवार्य है।
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