नवी मुंबई फ्लेमिंगो संकट: जहरीले हुए वेटलैंड्स, शहर से रूठे गुलाबी मेहमान

नवी मुंबई के नेरुल स्थित तीन प्रमुख वेटलैंड्स का पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि इस साल सर्दियों में आने वाले प्रवासी फ्लेमिंगो पक्षियों ने यहां का रुख नहीं किया। 22 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस के अवसर पर पर्यावरणविदों ने इसे गंभीर नवी मुंबई फ्लेमिंगो संकट बताते हुए वेटलैंड इमरजेंसी 2026 घोषित कर दी है। पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी और रसायनों की अधिकता ने पूरे इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाया है।

लैब टेस्ट में फेल हुए प्रमुख वेटलैंड्स

नैटकनेक्ट फाउंडेशन द्वारा ठाणे स्थित SSAS लेबोरेटरी से कराए गए जल परीक्षणों ने गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार नेरुल स्थित डीपीएस लेक, एनआरआई लेक और टीएस चाणक्य लेक का पानी पूरी तरह स्थिर और प्रदूषित हो चुका है। पानी की गुणवत्ता मापने वाले चारों बुनियादी पैमाने खतरनाक स्तर पर पाए गए हैं।

नवी मुंबई फ्लेमिंगो संकट के मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार नवी मुंबई फ्लेमिंगो संकट का मुख्य कारण समुद्र के ज्वारीय जल का रुक जाना है। फ्लेमिंगो का मुख्य भोजन विशेष शैवाल और सूक्ष्मजीव होते हैं जो खारे और साफ पानी के संतुलन में ही पनपते हैं। निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक ज्वार का रास्ता रुकने से ये झीलें प्रदूषित हो गई हैं। इसके अलावा टीएस चाणक्य लेक के पास लगभग 14 हेक्टेयर वेटलैंड पर अवैध मछली पालन के तालाब बना दिए गए हैं।

2018 में स्थानीय नागरिकों ने सिडको के खिलाफ गोल्फ कोर्स परियोजना को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई जीती थी। इसके बावजूद स्थितियां बिगड़ती रहीं और मई 2024 में ज्वारीय जल रुकने व कृत्रिम रोशनी से दिशा भटकने के कारण 10 से अधिक फ्लेमिंगो की मौत हो गई थी। नैटकनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बी. एन. कुमार ने स्पष्ट किया है कि इन झीलों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो चुका है।

इकोसिस्टम और शहर पर व्यापक प्रभाव

ये प्रभावित झीलें ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो सैंक्चुअरी के सैटेलाइट वेटलैंड्स के रूप में काम करती हैं। ठाणे क्रीक एक मान्यता प्राप्त रामसर साइट है और इसके 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इन वेटलैंड्स का विनाश अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधियों का उल्लंघन माना जाता है।

नवी मुंबई एनवायरनमेंट प्रिजर्वेशन सोसाइटी के संदीप सरीन का कहना है कि सिडको संरक्षण के ऊपर कंक्रीट बिछा रहा है और फ्लेमिंगो पर्यावरण के लिए खतरे की पूर्व चेतावनी देने वाले पक्षी हैं।

वेटलैंड्स प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते हैं जो शहर को बाढ़ से बचाते हैं। इनके नष्ट होने से शहर के भूजल स्तर और गुणवत्ता दोनों पर सीधा असर पड़ेगा। आमतौर पर प्रवासी पक्षी नवंबर से मई के बीच आते हैं, लेकिन 2026 के पीक सीजन में उनका पूरी तरह गायब होना गहरी चिंता का विषय है।

विकास प्राधिकरण का रुख और कानूनी जिम्मेदारी

पर्यावरणविद इस स्थिति के लिए सीधे सिडको को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। प्राधिकरण का दावा है कि वे पर्यावरण और न्यायपालिका के सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और पानी का प्राकृतिक प्रवाह कृत्रिम रूप से नहीं रोका गया। हालांकि लैबोरेटरी के नतीजे सिडको के दावों के विपरीत हैं। महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी और वन विभाग की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे वेटलैंड संरक्षण अधिनियम के तहत इन जल निकायों की रक्षा करें।

नवी मुंबई फ्लेमिंगो संकट केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि अनियोजित शहरीकरण की स्पष्ट चेतावनी है। पर्यावरणविदों की मांग है कि ज्वारीय जल के प्राकृतिक प्रवाह को तत्काल बहाल किया जाए और वेटलैंड इमरजेंसी 2026 पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT तुरंत संज्ञान ले।