नई दिल्ली | ताज़ा खबर डेस्क। अमेरिका और इज़रायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अपना सबसे खतरनाक पत्ता खेल दिया है। ईरान ने अपनी अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ का वीडियो जारी किया है जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग रोकने के लिए तैनात नौसैनिक सुसाइड ड्रोन्स की विशाल फौज दिखाई गई है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है — और अब यह रास्ता सीधे खतरे में है।
अंडरग्राउंड ठिकानों से ऑपरेट होती खुफिया ‘मिसाइल सिटी’
ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने एक विशाल अंडरग्राउंड परिसर के अंदर से फिल्माया गया वीडियो जारी किया जिसमें लंबी सुरंगों में नौसैनिक ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइलें और सी-माइन्स की कतारें दिखाई गई हैं। कुछ क्लिप में इन हथियारों को दागते हुए भी दिखाया गया।
Reuters ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दर्जनों सी-माइन्स बिछा दी हैं। यह ठिकाना रातोंरात नहीं बना। मार्च 2021 में पहली बार इसकी झलक मिली थी और जनवरी-फरवरी 2025 में IRGC ने फारस की खाड़ी के तटीय क्षेत्र में अपने ‘स्ट्रेटेजिक मिसाइल बेस’ का औपचारिक अनावरण किया था।
क्या-क्या है इस जखीरे में?
इस अंडरग्राउंड परिसर में अबाबिल-2 और अबाबिल-3 कामिकाज़े ड्रोन रेल-लॉन्चर पर तैयार खड़े हैं जो जहाज़ों के सेंसर और सुपरस्ट्रक्चर पर एकतरफा हमले के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इसके अलावा शाहेद-136 ड्रोन के नौसैनिक वेरिएंट, नास्र-1 एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें, ख़लीज फ़ार्स बैलिस्टिक मिसाइलें और माहम तथा सदफ-02 सी-माइन्स भी तैयार हालत में रखी हैं।
IRGC के ब्रिगेडियर जनरल अली फदावी ने चेतावनी दी — “हमारे पास ऐसी मिसाइलें हैं जो पानी के नीचे से दागी जा सकती हैं जिनकी रफ्तार 100 मीटर प्रति सेकंड है। आने वाले दिनों में हम इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।”
युद्ध का खतरनाक ‘अर्थशास्त्र’
इस संघर्ष का आर्थिक पहलू हथियारों से भी ज़्यादा चिंताजनक है। ईरान का एक शाहेद-136 ड्रोन महज़ करीब 40,000 डॉलर (₹36 लाख) का पड़ता है। लेकिन इसे रोकने के लिए अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों को 3 से 4 मिलियन डॉलर (करीब 35 करोड़ रुपये) की PAC-3 पैट्रियट मिसाइल दागनी पड़ती है। एक सस्ता ड्रोन करोड़ों की मिसाइल को खा रहा है — यह असममित युद्ध पश्चिमी देशों के रक्षा बजट पर बहुत भारी पड़ रहा है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ ने खुली धमकी दी — “ईरानी द्वीपों पर किसी भी हमले से सारी सीमाएं टूट जाएंगी। हम फारस की खाड़ी को आक्रमणकारियों के खून से भर देंगे।”
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने भी कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद रहेगा और अमेरिकी ठिकानों पर हमले हो सकते हैं।
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क्या वाकई अभेद्य हैं ये ठिकाने?
जनवरी-फरवरी 2025 में IRGC ने अपने ‘स्ट्रेटेजिक मिसाइल बेस’ का अनावरण किया था जिसमें सुसाइड ड्रोन नौकाओं के लिए बड़े बे, सैकड़ों क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलें तथा होर्मुज़ में तैनाती के लिए तैयार परिष्कृत नौसैनिक माइन्स दिखाई गई थीं। लेकिन इज़रायली थिंक टैंक ‘अल्मा’ की सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार 8-9 मार्च को अमेरिका-इज़रायल की सेनाओं ने इस्फहान में ईरान की शाहेद ड्रोन फैक्ट्रियों पर सटीक बमबारी करके भारी नुकसान पहुंचाया। होर्मुज़ जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को बलपूर्वक रोकना UNCLOS 1982 का सीधा उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून में इसे युद्ध की खुली घोषणा माना जा सकता है।
भारत और दुनिया पर असर
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वैश्विक तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। ईरान पहले ही होर्मुज़ से गुज़रने वाले तेल टैंकरों पर सुसाइड ड्रोन नौकाओं से कई हमले कर चुका है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 87 प्रतिशत आयात करता है — इसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
