नई दिल्ली | ताज़ा खबर डेस्क। अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। भारतीय नौसेना के एस्कॉर्ट में Shipping Corporation of India के दो LPG टैंकर — Shivalik और Nanda Devi — 14 मार्च 2026 को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार करके भारत की ओर रवाना हो गए। दोनों जहाज़ गुजरात के Mundra और Kandla बंदरगाह पर 16-17 मार्च तक पहुँचने की उम्मीद है।
होर्मुज़ बंद होने से क्यों मचा हड़कंप
28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके चलते 24 भारतीय जहाज़ फारस की खाड़ी में फंसे हुए थे जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार थे।
भारत सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए रिफाइनरियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया और उद्योगों को LPG बिक्री पर रोक लगाई ताकि 33 करोड़ घरों में रसोई गैस की कमी न हो। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 87 प्रतिशत आयात करता है जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
मोदी की कूटनीति और Navy का एस्कॉर्ट
PM मोदी ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के होर्मुज़ बंद रखने के ऐलान के कुछ घंटों बाद ही ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को फोन किया। मोदी ने X पर लिखा — “भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वस्तुओं तथा ऊर्जा का निर्बाध पारगमन भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संकट शुरू होने के बाद से ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से चार बार बात की — 28 फरवरी, 5 मार्च, 10 मार्च और 12 मार्च को।
Indian Navy के destroyer और MH-60R helicopter ने दोनों टैंकरों को एस्कॉर्ट किया। Operation Sankalp के तहत कम से कम तीन Indian Navy के जहाज़ Gulf of Oman में तैनात थे।
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“भारत हमारा दोस्त है” — ईरानी राजदूत
ईरानी राजदूत मोहम्मद फतली ने शुक्रवार रात पुष्टि की — “हाँ, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है। ईरान और भारत के इस क्षेत्र में साझा हित हैं।” भारत और ईरान के रिश्ते 1950 की मैत्री संधि से चले आ रहे हैं और चाबहार बंदरगाह परियोजना इस साझेदारी की आधुनिक मिसाल है।
भारत का त्रिकोणीय कूटनीतिक संतुलन
ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों के लिए सख्त नीति बनाए रखते हुए भारत को एक महत्वपूर्ण छूट दी। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि भारत ने इस पूरे संकट में तटस्थ रुख बनाए रखा। एक तरफ अमेरिका और इज़रायल — दूसरी तरफ ईरान और चाबहार — तीसरी तरफ खाड़ी के अरब देश जहाँ लाखों भारतीय काम करते हैं।
भारत ने Operation Sankalp के तहत स्वतंत्र रूप से अपने जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की — किसी भी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बने बिना। पश्चिम एशिया में भारत का करीब 59 अरब डॉलर का निर्यात बाज़ार भी दाँव पर है।
अभी भी 22 जहाज़ अटके हैं
Shivalik और Nanda Devi के गुज़र जाने के बाद अभी भी 22 भारतीय जहाज़ फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। भारत सरकार इन सभी के लिए सुरक्षित रास्ते की माँग कर रही है।
Shivalik और Nanda Devi का होर्मुज़ पार करना भारत की कूटनीतिक सफलता है — लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। बाकी 22 जहाज़ों का रास्ता खुलवाना और इस संकट में अपना तेल, व्यापार और रिश्ते तीनों बचाना — यही भारत की अगली चुनौती है। जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, ताज़ा खबर पर सबसे पहले जानकारी दी जाएगी।
