पटना, 17 मार्च 2026 | Taaza Khabar Desk. बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। 16 मार्च 2026 को संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में NDA ने सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया। RJD उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की हार के बाद कांग्रेस के तीन विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर महागठबंधन में जबरदस्त दरार आ गई है।
हार का गणित — 4 विधायकों की गैरहाजिरी पड़ी भारी
बिहार विधानसभा में एक सीट जीतने के लिए 41 प्रथम वरीयता वोट जरूरी थे। मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक — मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी), सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मीकि नगर) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज) — सदन से नदारद रहे। RJD के विधायक फैसल रहमान भी अनुपस्थित रहे, जिन्होंने मां की बीमारी का हवाला दिया।
| चुनाव विवरण | संख्या |
|---|---|
| बिहार विधानसभा कुल सदस्य | 243 |
| जीत के लिए आवश्यक वोट | 41 |
| अमरेंद्र धारी सिंह (RJD) को वोट | 37 |
| शिवेश कुमार (BJP) को द्वितीय वरीयता वोट | 30 |
| अनुपस्थित विधायक | 4 (3 कांग्रेस, 1 RJD) |
BJP उम्मीदवार शिवेश कुमार ने 30 द्वितीय वरीयता वोटों के आधार पर पाँचवीं सीट जीती। NDA के विजयी उम्मीदवारों में नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर (JDU), नितिन नवीन और शिवेश कुमार (BJP) तथा उपेंद्र कुशवाहा (RLM) शामिल हैं।
तेजस्वी का BJP पर हमला, JDU का कांग्रेस पर कटाक्ष
RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने हार के लिए BJP के धनबल और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विधायकों ने धोखा न दिया होता तो यह चुनाव जीत जाते।
JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने घर को नहीं संभाल सकती और उनके विधायकों को अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।
पुरानी दरार फिर हुई ताजा
यह पहली बार नहीं है जब दोनों पार्टियों के बीच कड़वाहट सामने आई हो। 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन (70 में से केवल 19 सीट) के बाद RJD नेताओं ने खुलेआम कांग्रेस को गठबंधन की कमजोर कड़ी बताया था। इस बार की “धोखेबाजी” ने पुराने घावों को हरा कर दिया है। RJD का जमीनी कैडर अब कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़ने की मांग कर रहा है।
हालांकि आलोचकों का मानना है कि RJD स्वयं भी अपना एक विधायक नहीं बचा पाई, इसलिए सारा दोष केवल कांग्रेस पर मढ़ना उचित नहीं है।
क्रॉस वोटिंग और कानूनी पेंच
राज्यसभा चुनाव संविधान के अनुच्छेद 80(4) के तहत ओपन बैलट से होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के कुलदीप नायर बनाम भारत संघ (2006) फैसले के अनुसार राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर दल-बदल कानून के तहत विधायकी स्वतः रद्द नहीं होती। यही कानूनी खामी विधायकों को पार्टी के खिलाफ जाने की छूट देती है, हालांकि पार्टी उन्हें निष्कासित जरूर कर सकती है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस अपने बागी विधायकों पर सख्त कार्रवाई नहीं करती, तो आगामी चुनावों में RJD अकेले चलने का फैसला ले सकती है। यह स्थिति बिहार में NDA को और मजबूत करेगी।
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