नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका के खिलाफ शामिल विवादित चैप्टर पर कड़ा एक्शन लिया। कोर्ट ने यह चैप्टर तैयार करने वाले तीनों विशेषज्ञों को ब्लैकलिस्ट करते हुए NCERT के जवाब को “परेशान करने वाला” बताया।
क्या है पूरा मामला?
NCERT की कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नाम का एक चैप्टर शामिल था। फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश बताया था। इसके बाद किताब के प्रकाशन, वितरण और डिजिटल प्रसार पर पूरी तरह रोक लग गई।
NCERT का जवाब क्यों नहीं माना कोर्ट ने?
NCERT निदेशक ने हलफनामे में कहा कि विवादित चैप्टर “फिर से लिख दिया गया है।” लेकिन CJI सूर्य कांत की बेंच इससे नाराज हो गई। कोर्ट ने कहा —
- हलफनामे में यह नहीं बताया कि नया चैप्टर किसने लिखा
- समिति में कोई भी जाना-माना कानूनी विशेषज्ञ नहीं था
- मंजूरी किसने दी, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया
कौन हैं तीनों ब्लैकलिस्ट विशेषज्ञ?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को आदेश दिया कि इन तीनों से तुरंत संबंध तोड़े जाएं:
- प्रो. मिशेल डैनिनो — समिति अध्यक्ष
- सुपर्णा दिवाकर — सदस्य
- आलोक प्रसन्ना कुमार — सदस्य
अब ये किसी भी सरकारी या सार्वजनिक पैसे से चलने वाले पाठ्यक्रम निर्माण का हिस्सा नहीं बन सकेंगे।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक हफ्ते के अंदर नई विशेषज्ञ समिति बनाने का आदेश दिया है। इस समिति में शामिल होंगे:
- कम से कम एक पूर्व न्यायाधीश
- एक वरिष्ठ शिक्षाविद्
- एक प्रसिद्ध कानून विशेषज्ञ
साथ ही राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से भी सलाह लेना अनिवार्य होगा। नया चैप्टर इस समिति की मंजूरी के बाद ही प्रकाशित होगा।
