सरकार ने MGNREGA में बड़े बदलाव की घोषणा कर दी है। काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। योजना का नाम भी बदलकर पुज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना कर दिया गया है। मजदूरी को भी ₹240 प्रतिदिन निर्धारित किया गया है। यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब ग्रामीण परिवारों को ज्यादा काम और ज्यादा कमाई का मौका मिलेगा।
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MGNREGA में क्या बदलाव हुए हैं?
भारत सरकार ने 12-13 दिसंबर 2025 को MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। यह योजना भारत के ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत अब तक ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का काम दिया जाता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
योजना का नया नाम
MGNREGA का नाम बदलकर पुज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना (PBGRY) कर दिया गया है। यह नाम महात्मा गांधी को सम्मान देते हुए रखा गया है। महात्मा गांधी ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय के पक्षधर थे। इसलिए यह नाम बहुत ही उपयुक्त है।
125 दिन का काम कैसे बदलेगा ग्रामीण जीवन?
MGNREGA में 125 दिन के काम की गारंटी ग्रामीण लोगों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लाएगी:
आय में वृद्धि: पहले जो लोग 100 दिन काम करके ₹8,000-10,000 कमाते थे, अब वे 125 दिन काम करके ₹10,000-12,500 अतिरिक्त कमा सकते हैं।
बेरोजगारी में कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। अब ज्यादा दिन काम मिलने से लोगों को शहरों में माइग्रेशन नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक सुरक्षा: किसान और ग्रामीण मजदूरों के लिए यह योजना एक आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी।
स्थानीय विकास: इन 125 दिनों में सड़कें, तालाब, कुएं और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा, जिससे गांव का विकास होगा।
मजदूरी में क्या बदलाव हुए हैं?
MGNREGA में मजदूरी दर को भी बढ़ाया गया है:
पहले: राज्य के अनुसार विभिन्न दरें थीं (आमतौर पर ₹200-230)
अब: ₹240 प्रतिदिन निर्धारित की गई है
यह राशि पूरे देश में एक जैसी होगी। हालांकि, विभिन्न राज्यों में महंगाई अलग-अलग है, लेकिन यह एक अच्छा कदम है।
काम के दिनों की तुलना
| विवरण | पहले (MGNREGA) | अब (PBGRY) | अंतर |
|---|---|---|---|
| काम के दिन | 100 दिन | 125 दिन | +25 दिन |
| मजदूरी दर | ₹200-230 | ₹240 | +₹10-40 |
| वार्षिक आय (100 दिन) | ₹20,000-23,000 | ₹12,500 अतिरिक्त | ₹30,000 |
| कुल वार्षिक आय | ₹20,000-23,000 | ₹30,000 | 30-50% वृद्धि |
योजना की मुख्य बातें
1. काम के दिन: 125 दिन की गारंटी
2. दैनिक मजदूरी: ₹240 प्रतिदिन
3. भुगतान का समय: 15 दिन में मजदूरी दी जाएगी
4. काम का प्रकार: सड़क, तालाब, कुआं, ईंट निर्माण आदि
5. खेती के मौसम: खेती के दौरान 60 दिन का विराम
6. केंद्र-राज्य फंडिंग: 60% केंद्र, 40% राज्य (सामान्य राज्यों के लिए)
7. मूल्य निर्धारण: कौशल आधारित मजदूरी में भी सुधार हो सकता है
कौन योग्य है MGNREGA/PBGRY के लिए?
MGNREGA में नियोजित होने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:
1. भारतीय नागरिक: आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए
2. ग्रामीण क्षेत्र: योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है
3. वयस्क: आवेदक 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का होना चाहिए
4. कुशल/अकुशल मजदूरी: अकुशल और कुशल दोनों तरह की मजदूरी के लिए योग्य
5. काम के इच्छुक: व्यक्ति को स्वेच्छा से काम करने की इच्छा होनी चाहिए
6. परिवार के सदस्य: किसी परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य आवेदन कर सकता है
MGNREGA के तहत कौन से काम होते हैं?
MGNREGA के तहत निम्नलिखित प्रकार के काम होते हैं:
1. जल संरक्षण: तालाब, कुएं, चेक डैम, बोरवेल आदि का निर्माण
2. सड़क निर्माण: गांव की सड़कें, पक्की सड़कें, गांव की पगडंडियां
3. कृषि विकास: सिंचाई योजनाएं, खेत की सीमा तय करना, मेंड बनाना
4. वन संरक्षण: वन रोपण, वन की सफाई, जंगल की सुरक्षा
5. बाढ़ नियंत्रण: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बांध और तटबंध निर्माण
6. आवास विकास: अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आवास निर्माण
7. पशु संसाधन: गोशाला, डेयरी इकाई का विकास
8. कौशल विकास: प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल विकास
MGNREGA में आवेदन कैसे करें?
MGNREGA में काम के लिए आवेदन करना बहुत ही आसान है:
चरण 1: Job Card बनवाना
- अपने ब्लॉक के तहसील या ग्राम पंचायत में जाएं
- आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और अन्य दस्तावेज साथ ले जाएं
- Job Card के लिए आवेदन करें
- Job Card 30 दिन में मिल जाएगा
चरण 2: काम की मांग करना
- Job Card मिलने के बाद काम के लिए आवेदन करें
- आप मौखिक रूप से या लिखित रूप से मांग कर सकते हैं
- पंचायत को 15 दिन में काम देना होगा
चरण 3: काम शुरू करना
- निर्धारित स्थान पर काम शुरू करें
- काम के रिकॉर्ड को ठीक से रखें
- हाजिरी पंचायत में दर्ज कराएं
चरण 4: मजदूरी प्राप्त करना
- काम पूरा होने के 15 दिन में मजदूरी बैंक खाते में आएगी
- यदि 15 दिन में भुगतान नहीं होता तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा
MGNREGA की अन्य महत्वपूर्ण बातें
बेरोजगारी भत्ता: यदि काम के लिए आवेदन के 15 दिन बाद भी काम नहीं दिया जाता, तो लाभार्थी को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। यह राशि दैनिक मजदूरी का एक हिस्सा होती है।
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान: MGNREGA में कम से कम 50% काम महिलाओं को दिया जाना चाहिए। महिलाओं को समान मजदूरी का अधिकार है।
दिव्यांगजन: दिव्यांग व्यक्तियों को भी MGNREGA के तहत काम दिया जाता है। उनके लिए सरल काम चुने जाते हैं।
ठेकेदार पर प्रतिबंध: MGNREGA में ठेकेदार का उपयोग प्रतिबंधित है। यह सीधे ग्राम पंचायत के द्वारा कराया जाता है।
आधार ई-पेमेंट: सभी भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किए जाते हैं।
केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग
नई योजना में फंडिंग पैटर्न में भी बदलाव हुआ है:
| राज्य/क्षेत्र | केंद्र | राज्य |
|---|---|---|
| सामान्य राज्य | 60% | 40% |
| उत्तरपूर्वी राज्य | 90% | 10% |
| हिमालयी राज्य | 90% | 10% |
| संघ राज्य क्षेत्र | 100% | – |
यह नई फंडिंग व्यवस्था राज्यों के विकास स्तर को ध्यान में रखती है।
MGNREGA का इतिहास
MGNREGA का इतिहास बहुत महत्वपूर्ण है:
2005: NREGA अधिनियम बनाया गया (200 सबसे पिछड़े जिलों में)
2006-07: 2006 में प्रारंभ किया गया
2007-08: 130 अतिरिक्त जिलों में विस्तार
2008-09: पूरे देश में लागू किया गया
2009: MGNREGA में नाम बदल दिया गया (महात्मा गांधी को सम्मान देते हुए)
2025: अब 125 दिन और नया नाम PBGRY
अब तक के आंकड़े
- कुल व्यक्ति-दिन: 4,872.16 करोड़
- कुल खर्च: ₹11,74,692.69 करोड़
- वर्तमान में लाभार्थी: 4.71 करोड़ परिवार
- काम करने वाले व्यक्ति: 6.25 करोड़
MGNREGA की आलोचनाएं और समस्याएं
हालांकि MGNREGA एक अच्छी योजना है, लेकिन कुछ समस्याएं हैं:
1. देरी से भुगतान: कई स्थानों पर मजदूरी का भुगतान देरी से होता है
2. कम मजदूरी: ₹240 अभी भी कुछ राज्यों में न्यूनतम मजदूरी से कम है
3. काम की कमी: कई बार काम मांगने पर 100 दिन तक काम नहीं मिलता
4. गुणवत्ता में कमी: कुछ काम सही तरीके से नहीं होता है
5. राजनीतिक पक्षपात: कुछ क्षेत्रों में काम राजनीतिक आधार पर दिया जाता है
6. आधार ई-पेमेंट: कुछ लोगों को आधार लिंकिंग में समस्या आती है
MGNREGA से कितना लाभ उठा सकते हैं?
आइए एक उदाहरण से समझते हैं:
श्रीमती सुनीता: 35 वर्षीय, गांव में रहती हैं, अकुशल मजदूर
पहले (100 दिन):
- 100 दिन x ₹230 = ₹23,000 वार्षिक आय
अब (125 दिन):
- 125 दिन x ₹240 = ₹30,000 वार्षिक आय
लाभ: ₹7,000 अतिरिक्त आय
यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन गांव की अर्थव्यवस्था में यह काफी महत्वपूर्ण है। यह राशि स्कूल की फीस, खाना, कपड़े आदि के लिए काफी हो सकती है।
भविष्य की योजना
सरकार MGNREGA को और भी बेहतर बनाने की योजना बना रही है:
1. डिजिटलीकरण: पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है
2. कौशल विकास: कौशल प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जा रहा है
3. महिला केंद्रित: महिला सशक्तिकरण पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है
4. पर्यावरण संरक्षण: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए काम को डिजाइन किया जा रहा है
5. बुनियादी ढांचा: गांव के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q: क्या MGNREGA और PBGRY दोनों एक ही हैं?
उत्तर: हां, PBGRY MGNREGA का नया नाम है। बस नाम बदल गया है।
Q: 125 दिन काम जरूरी है क्या?
उत्तर: नहीं, यह 125 दिन की गारंटी है। यदि काम नहीं मिलता तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
Q: क्या शहर में रहने वाले लोग MGNREGA का लाभ उठा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए है।
Q: महिलाओं को क्या अलग भत्ता मिलता है?
उत्तर: नहीं, महिलाओं को समान मजदूरी मिलती है। हां, कम से कम 50% काम महिलाओं को दिया जाता है।
Q: Aadhaar लिंकिंग जरूरी है?
उत्तर: हां, सभी भुगतान Aadhaar से लिंक्ड बैंक खाते में होते हैं।
Q: क्या MGNREGA में काम कर रहे हैं तो pension मिलेगी?
उत्तर: MGNREGA के तहत सीधा pension नहीं मिलता, लेकिन अन्य पेंशन योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अंतिम विचार
MGNREGA में 125 दिन का काम और ₹240 की मजदूरी ग्रामीण भारत के लिए एक सकारात्मक कदम है। यह योजना गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। 2005 से लेकर अब तक यह योजना लाखों परिवारों को मदद कर चुकी है। अब 125 दिन के साथ यह और भी प्रभावी होगी।
हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी हैं जैसे समय पर भुगतान और काम की उपलब्धता। लेकिन सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रामीण भारत की आशा है कि यह योजना उनके जीवन को और बेहतर बना सकेगी।
